भोपाल रेप-लव जिहाद केस: राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, पूरे कांड में बड़े नेटवर्क और फंडिंग की आशंका

bhopal rape love jihad case: भोपाल में हिंदू छात्राओं से रेप, ब्लैकमेलिंग और लव जिहाद के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की जांच में गंभीर खुलासे हुए हैं। आयोग ने इसे संगठित अपराध और संभावित धर्मांतरण नेटवर्क से जोड़ा है। रिपोर्ट राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजी गई है।

भोपाल रेप-लव जिहाद केस: राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, पूरे कांड में बड़े नेटवर्क और फंडिंग की आशंका

हाइलाइट्स

  • भोपाल लव जिहाद केस में NCW की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
  • धर्मांतरण के लिए दबाव और संगठित अपराध नेटवर्क की संभावना
  • NCW की रिपोर्ट में कॉलेज प्रशासन की लापरवाही उजागर

bhopal rape love jihad case: भोपाल के एक निजी कॉलेज में छात्राओं के साथ हुए रेप, ब्लैकमेलिंग और लव जिहाद के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आयोग ने इसे संगठित अपराध और संभावित धर्मांतरण नेटवर्क से जोड़ा है। रिपोर्ट राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजी गई है, जिसमें कॉलेज प्रशासन की लापरवाही और आरोपियों की फंडिंग की जांच की सिफारिश की गई है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की जांच में चौंकाने वाले खुलासे

भोपाल के एक निजी कॉलेज में छात्राओं के साथ हुए रेप और लव जिहाद के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की जांच में गंभीर तथ्य उजागर हुए हैं। बंसल न्यूज के पास आई राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित ने पूरी आपबीती बताई है। पीड़ित के अनुसार आरोपी साद ने भी लड़कियों को ड्रग्स दिया था, जिसके बाद लड़कियों से रेप किया गया। इतना ही नहीं... कपड़े नहीं उतारने पर आरोपियों द्वारा लड़कियों को मारा जाता था। आरोपी फरहान धर्म परिवर्तन करवाने पर अड़ा था, फरहान जबरदस्ती लकड़ियों को बुर्का पहनने के लिए कहता था।

कॉलेज प्रशासन की लापरवाही, दस्तावेजों की खराब स्थिति

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉलेज के दस्तावेजों का रखरखाव सही तरीके से नहीं किया गया। दस्तावेजों को गैरजिम्मेदाराना तरीके से रखा जाता था, जिससे मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया। कॉलेज प्रशासन समझौता कराने में लगा था।

आयोग ने इसे संगठित अपराध और संभावित धर्मांतरण नेटवर्क से जोड़ा है। जिसमें आरोपियों के लिए संगठित अपराध का केस दर्ज होना चाहिए। आयोग ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजी रिपोर्ट में कॉलेज प्रशासन की लापरवाही और आरोपियों की फंडिंग की जांच की सिफारिश की है।

छात्राओं को महंगे तोहफे और नशीले पदार्थों से फंसाया

महिला आयोग की तीन सदस्यीय जांच समिति की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने छात्राओं को महंगे तोहफे, कपड़े और घुमाने का लालच देकर प्रेमजाल में फंसाया। उन्हें नशीले पदार्थ देकर आपत्तिजनक तस्वीरें खींची गईं और ब्लैकमेल किया गया। पीड़िताएं मानसिक और सामाजिक दबाव में हैं, फिर भी उन्होंने साहस दिखाकर FIR दर्ज कराई।

आरोपियों की विलासितापूर्ण जीवनशैली और फंडिंग की जांच

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों की सामान्य पारिवारिक स्थिति के बावजूद उनकी विलासितापूर्ण जीवनशैली ड्रग तस्करी जैसे संगठित अपराध की संभावना को दर्शाती है। आयोग ने सुझाव दिया कि आरोपियों की फंडिंग की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या उन्हें किसी संगठन से वित्तीय सहायता मिल रही थी।

धर्मांतरण के लिए दबाव और साजिशपूर्ण नेटवर्क

जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने पीड़िताओं पर धर्मांतरण के लिए दबाव डाला, जो एक साजिशपूर्ण नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। आयोग ने सुझाव दिया कि इसकी राज्यव्यापी जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या आरोपियों को किसी संगठन से वित्तीय सहायता मिल रही थी।

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हिंदू लड़कियों के साथ रेप और लव जिहाद का मामला

दरअसल, राजधानी भोपाल में एक प्राइवेट कॉलेज में हिंदू छात्राओं के साथ रेप, ब्लैकमेलिंग, धर्मांतरण की कोशिश और लव जिहाद के सनसनीखेज मामले में लगातार जांच जारी है। यहां कुछ मुस्लिम युवकों ने पहले इन छात्राओं को प्रेमजाल में फंसाया, फिर उनके साथ दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया। इस मामले पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है, सभी आरोपी पुलिस गिरफ्त में हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले में लिया था संज्ञान

इस केस में राष्ट्रीय महिला आयोग ने गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। पूर्व डीजीपी निर्मल कौर की अध्यक्षता वाली समिति ने समिति ने भोपाल में पीड़ित छात्राओं, उनके परिजनों, पुलिस अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर जांच की, समिति ने उन स्थानों का भी दौरा किया, जहां पीड़िताओं को नशीली दवाएं देकर उनके साथ अमानवीय कृत्य किए गए। जांच समिति में निर्मल कौर, आईपीएस (सेवानिवृत्त), पूर्व पुलिस महानिदेशक, झारखंड (अध्यक्ष) निर्मला नायक, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, जबलपुर (सदस्य) और आशुतोष पांडे, अवर सचिव, राष्ट्रीय महिला आयोग (सदस्य) शामिल थे।

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