Bhopal Gas Kand : इन लोगों को मिलेगी एक-एक हजार रुपये की मासिक पेंशन, सीएम ने किया ऐलान

भोपाल। सीएम शिवराज सिंह के गैस त्रासदी की 36वीं बरसी पर बड़ा ऐलान किया है। सीएम ने कहा है कि bhopal gas kand गैस पीड़ित विधवा पेंशन दोबारा शुरू होगी। बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित सर्वधर्म सभा में सीएम शिवराज सिंह ये बात की है। सीएम ने इस दौरान दिवंगत गैस पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा। सीएम ने भोपाल में गैस त्रासदी स्मारक बनाने का भी ऐलान किया है। सीएम ने कहा कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए दुनिया को स्मारक संदेश देगा। स्मारक की जिम्मेदारी मंत्री विश्वास सारंग की रहेगी।

एक-एक हजार रुपये की मासिक पेंशन
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गैस त्रासदी की घटना में विधवा हो गईं प्रत्येक कल्याणी बहन को एक-एक हजार रुपये की मासिक पेंशन पुन प्रारंभ की जाएगी। यह पेंशन नियमित रूप से कल्याणी महिलाओं को मिलती थी। वर्ष 2019 में यह पेंशन बंद कर दी गई थी, जिसे फिर से प्रारंभ किया जाएगा। सीएम शिवराज ने कहा कि राजधानी में गैस त्रासदी से संबंधित एक विशिष्ट स्मारक भी होना चाहिए। शीघ्र ही यह प्रकाश स्तम्भ स्मारक बनाया जाएगा जो प्रेरणा का कार्य करेगा।

स्वास्थ्य की गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गईं
सीएम शिवराज ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित लोगों के समक्ष स्वास्थ्य की गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गईं थीं। इनको प्राथमिकता से उपचार की पूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। कोरोना काल के संकट को देखते हुए ऐसे रोगियों के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यही नहीं स्वच्छ नर्मदा जल भी पुराने और नए भोपाल के नागरिकों को मिल रहा है। गैस त्रासदी से संबंधित कचरा निपटान की व्यवस्थाएं की गईं हैं। इन्हें और पुख्ता करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हमें विकास का ऐसा मॉडल बनाना है जो मानव- हितैषी हो।

अपने सुख की खातिर मानवता को संकट में डाला
सीएम शिवराज ने कहा कि इंसान ने अपने सुख की खातिर मानवता को संकट में डाला। बिगड़ता पर्यावरण विनाश का कारण बनता है। परमाणु बम से जहां निर्दोष नागरिक मारे जाते हैं वहीं कीटनाशकों के निर्माण के भी भयावह परिणाम भी देखने को मिलते हैं। यह धरती सभी के लिए बनी है।

गैस त्रासदी के दिवंगतों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी
मनुष्यों के साथ पशु-पक्षी, कीट-पतंग, नदी-समुद्र, पेड़-पौधे सभी धरा के हिस्से हैं। वर्ष 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी के दुष्प्रभावों का जिक्र करते हुए बताया कि सड़कों पर बदहवास दौड़ रहे लोग तेज सांस चलने के कारण जहरीली गैस से मौत के आगोश में समा गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अनेक नागरिकों के साथ-साथ पशुओं की दर्दनाक मृत्यु का साक्षी भी रहा हूँ। वास्तव में वे सभी घटनाएं हृदय विदारक और जीवन की दु:खद पीड़ा बन गई हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता की तरफ से गैस त्रासदी के दिवंगतों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

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