सौरभ शर्मा केस अपडेट: सरकारी खजाने में जमा होगा 52 किलो सोना, 11 करोड़ नकदी, अप्रेजल रिपोर्ट तैयार कर रहा आयकर विभाग

Saurabh Sharma Case Update: आयकर विभाग ने मैडोरी में इनोवा कार से जब्त किए गए 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकदी को सरकारी खजाने में जमा कराने की तैयारी शुरू कर दी है।

सौरभ शर्मा केस अपडेट: सरकारी खजाने में जमा होगा 52 किलो सोना, 11 करोड़ नकदी, अप्रेजल रिपोर्ट तैयार कर रहा आयकर विभाग

सौरभ शर्मा।

हाइलाइट्स
  • आयकर विभाग की पूछताछ में किसी ने नहीं किया इस रकम पर अपना दावा।
  • तीन एजेंसी पता नहीं कर पाईं 52 किलो सोना, 10 करोड़ नकदी का मालिक कौन।
  • आयकर विभाग, ईडी, लोकायुक्त पुलिस आरोपितों से कर चुकी हैं पूछताछ।

Saurabh Sharma Case Update: आयकर विभाग ने मैडोरी में इनोवा कार से जब्त किए गए 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकदी को सरकारी खजाने में जमा कराने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने इस संबंध में बैंक में जमा रकम की अप्रेजल रिपोर्ट जारी करने के बाद इसे सरकारी संपत्ति घोषित करने का निर्णय लिया है।

जांच में किसी ने नहीं किया दावा

आयकर विभाग की पूछताछ में परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, उनके सहयोगी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल ने इस सोने और नकदी पर कोई दावा नहीं किया।

सौरभ ने कहा कि कार चेतन सिंह गौर के नाम पर रजिस्टर्ड है, इसलिए वही इस बारे में सही जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, चेतन ने भी कहा कि वह कार में कभी नहीं बैठे और इसका उपयोग सौरभ करता था।

बेनामी संपत्ति शाखा की जांच जारी

आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति शाखा अभी भी इस मामले की जांच कर रही है। विगत वर्ष दिसंबर में सोना और नकदी बरामद होने के बाद सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल से कई दिनों तक पूछताछ की गई, लेकिन तीनों ने इस संपत्ति से कोई संबंध न होने की बात कही।

18 दिसंबर, 2024 को लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति के मामले में छापा मारा। इसके अगले दिन भोपाल के पास मेंडोरी गांव में एक इनोवा कार से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकदी बरामद हुई। कार सहित यह संपत्ति आयकर विभाग ने जब्त कर ली।

डीआरआइ की जांच भी अधूरी

सोने की तस्करी के मामले की जांच डीआरआइ भी कर रही है, लेकिन अब तक उसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना कहां से लाया गया और इसका मालिक कौन है। जब्त किए गए सोने और नकदी के मालिकाना हक को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण आयकर विभाग के पास अब इसे सरकारी संपत्ति घोषित कराने का ही एकमात्र विकल्प बचा है।

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