Bhai dooj 2021: भाई दूज पर शुभ ​मुहूर्त में करें भाई का तिलक

भोपाल। भाई दूज एक ऐसा त्योहार जिसका हर भाई—बहन को बेसब्री से इंतजार होता है। bhaee dooj par shubh ​muhoort mein karen bhaee ka tilak भाई—दूज का त्योहार वर्ष में दो बार आता है। दीपावली की दूज और होली की दूज। होली की दूज इस बार 30 मार्च को मनाई जाएगी। रक्षाबंधन की तरह इस दिन भी बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई भी अपनी बहनों के उनकी रक्षा का वचन देते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविन्द शास्त्री के अनुसार इस बार मंगलवार को पड़ रही भाई दूज का तिलक शुभ और अमृत मुहूर्त में किया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है मुहूर्त और इसका महत्व।

भाईदूज पर तिलक का मुहूर्त –
लाभ — सुबह 10:30 बजे से 12:00 बजे तक रहेगा।
अवधि – 1 घंटा 30 मिनट की अवधि रहेगी।
अमृत — 12:00 बजे से 01:30 बजे तक।
अवधि — 1 घंटा 30 मिनट की अवधि रहेगी।

तिलक करने की विधि
चूंकि इस दिन यम अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे, इसलिए इस दिन भाईयों को अपनी विवाहित बहनों के घर जाना चाहिए। कुंवारी लड़कियों घर पर ही भाई का तिलक करें। भगवान गणेश का ध्यान करके पूजा करें।

बुंदेलखण्ड में हैं यह परंपरा
बुंदेलखण्ड में भाई—दूज पर गाय के गोबर से दोजें बनाने की परंपरा है। इस सुबह से स्नान करके महिलाएं गाय के गोबर से घर के मुख्य द्वार पर दोजें बनाती हैं। फिर उनका पूजन करके भाई दूज की कथा सुनती हैं।

भाई की उतारते है नजर
पूजन के बाद गाय का गोबर, उसके ऊपर कटाई (जंगली पौधा जिसमें कांटा होता है) रखकर उसे मूसर से कूटा जाता है कूटते—कूटते बोला जाता है “जो कोई हमाए भैया को  देख के जरे बरे ….” शब्दों के साथ भाई की नजर उतारी जाती है।

ऐसें तैयार करें तिलक की थाली
भाई दूज पर तिलक करने के लिए पहले थाली तैयार करें उसमें रोली, गुलाल, गोला (नारियल) रखें तत्पश्चात भाई का तिलक करें और गोला भाई को दे दें। प्रेमपूर्वक अपने भाई को मनपसंद भोजन करवाएं। भाई अपनी बहनों से आशीर्वाद लेकर उन्हें कुछ भेंट दें।

धार्मिक महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार यम और उनकी बहन यमुना से जुड़ी हुई है। कथा के अऩुसार यमरात अपनी व्यस्तता के चलते बहन यमुना से मिलने नहीं जा पाते थे। एक दिन बहन यमुना के घर गए। यमुना के आदर-सत्कार से प्रसन्न होकर उन्होंने वरदान दिया था कि जो भी बहन इस दिन अपने भाई का तिलक करके उसे भोजन करवाएगी उसके भाई को किसी प्रकार से यम का भय नहीं रहेगा।

ये है पौराणिक मान्यता
जिनकी बहनें दूर रहती हैं, वे भाई अपनी बहनों से मिलने भाईदूज पर अवश्य जाते हैं और उनसे टीका कराकर उपहार आदि देते हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार ‘भाईदूज’ को मृत्यु के देवता ‘यम’ को प्रसन्न करने के लिये उनका षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है। ब्रजमंडल में इस दिन बहनें अपने भाइयों के साथ यमुना में स्नान करती हैं, यमुना तट पर भाई-बहन का साथ-साथ स्नान एवं भोजन करना कल्याणकारी माना जाता है।

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