बेतवा नदी के उद्गम स्थल पर संकट: सूख गई जलधारा, जंगलों की कटाई से बढ़ा खतरा, स्थानीय लोगों ने CM से की कार्रवाई की मांग

Betwa River: बेतवा नदी के उद्गम स्थल गोमुख से पानी की धार बहना बंद हो गई है। यह स्थिति आसपास हो रहे निर्माण कार्य और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण बनी है।

Betwa River Origin Crisis

Betwa River Origin Crisis: भोपाल के पास बेतवा नदी के उद्गम स्थल पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यहां बेतवा के उद्गम स्थल से बहने वाली जलधारा पूरी तरह से सूख गई है। इसके पीछे आसपास हो रहे पक्के निर्माण, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित विकास कार्य जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। स्थानीय पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों ने इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की है और नदी बचाओ अभियान की शुरुआत करने का संकल्प लिया है।

उद्गम स्थल पर बेतवा की सूखी धारा, चारों ओर कटते पेड़

रविवार को पर्यावरण प्रेमी उमाशंकर तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सी. पांडे, पूर्णेन्द्र शुक्ला, कमल राठी, सुनील दुबे और सतीश नायक ने कोलार स्थित बेतवा नदी के उद्गम स्थल का दौरा किया। उन्होंने देखा कि जहां कभी बेतवा की प्राकृतिक धारा बहती थी, वहां अब पानी नहीं है। आसपास की हरियाली पर भी संकट मंडरा रहा है, क्योंकि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी है।

बेतवा नदी (Betwa River) का यह उद्गम स्थल भोपाल के पास कोलार क्षेत्र में स्थित है। यह वही नदी है, जो आगे चलकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की जीवनरेखा बनती है। लेकिन यदि उद्गम स्थल से ही पानी की धार बंद हो जाएगी, तो भविष्य में इसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।

जंगलों की कटाई और अवैध निर्माण से बिगड़ रहा पारिस्थितिकी संतुलन

उद्गम स्थल के पास बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। जंगलों को समतल कर मैदानों में बदला जा रहा है। हालांकि सामने कुछ पेड़ लगे दिखते हैं, लेकिन पीछे पूरा जंगल काटा जा चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो बेतवा नदी की मुख्य धारा कमजोर हो जाएगी और यह क्षेत्र जल संकट का शिकार हो सकता है।

नदी बचाने के लिए एकजुट होंगे भोपाल के नागरिक

भोपाल के नागरिकों ने बेतवा नदी को उसके प्राकृतिक स्वरूप में लौटाने के लिए अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। आज शाम 4 बजे कोलार स्थित उद्गम स्थल पर स्थिति का जायजा लिया जाएगा, जिसके बाद नदी बचाओ आंदोलन की शुरुआत होगी।

मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग

पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे बेतवा नदी के उद्गम स्थल को संरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। जंगलों की अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं और अवैध निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाए।

बेतवा नदी का महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बेतवा नदी (Betwa River) मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के कोलार क्षेत्र से निकलती है। यह नदी गंगा बेसिन का हिस्सा है और आगे चलकर उत्तर प्रदेश में यमुना नदी में मिलती है।

लंबाई – 590 किमी
बेसिन क्षेत्र – 46,580 वर्ग किमी
महत्वपूर्ण शहर – भोपाल, विदिशा, झांसी, और औरैया

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बेतवा नदी के उद्गम स्थल के बारे में जानकारी 

बेतवा नदी का इतिहास भी समृद्ध है। यह प्राचीन भारत के बुंदेलखंड क्षेत्र की प्रमुख नदी रही है। इसके किनारे कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल स्थित हैं, जिनमें ओरछा, भोजपुर और झांसी शामिल हैं। बेतवा नदी का उद्गम स्थल भोपाल के पास कोलार में स्थित है। यह नदी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बहती हुई यमुना नदी में मिल जाती है।

यदि समय रहते बेतवा नदी के उद्गम स्थल को नहीं बचाया गया, तो यह नदी अपना अस्तित्व खो सकती है। अब जरूरी है कि स्थानीय प्रशासन, सरकार और आम जनता मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाए ताकि बेतवा नदी फिर से अपनी मुख्य धारा में लौट सके।

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