Bata Shoes History: स्वदेशी नहीं विदेश कंपनी है बाटा, जानिए इसकी रोचक कहानी

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नई दिल्ली। भारत में जूते-चप्पल की कंपनी बाटा काफी लोकप्रिय है। इसके उत्पाद सस्ते और मजबूत होते हैं। यही कारण है कि इसका चलन मध्यवर्गीय परिवारों में सबसे अधिक है। लेकिन कई लोगों को लगता है कि बाटा भारतीय कंपनी है। ऐसे में आज हम आपको बाटा के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताएंगे, जिनके बारे में शायद ही आपको पता हो।

भारतीय कंपनी नहीं है बाटा

काफी लोगों को लगता है कि बाटा एक भारतीय कंपनी है। लेकिन, यदि आप ऐसा सोचते हैं, तो आप गलत हैं। बाटा चेकोस्लोवाकिया की कंपनी है और इसकी शुरुआत साल 1894 में हुई थी। एक छोटे से कस्बे में रहने वाला बाटा परिवार कई पीढ़ियों से जूते बना कर गुजर-बसर कर रहा था। आर्थिक तंगियों के कारण, उनकी जिंदगी काफी मुश्कलों से गुजर रही थी। परिवार की इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए युवा थॉमस ने चमड़े के बजाय, कैनवास से जूते सिलने का काम शुरू किया। इस काम में उसे अपनी बहन एन्ना और भाई एंटोनिन का भी साथ मिला। उसके जूते आरामदायक, किफायती और मजबूत होते थे, इसी कारण स्थानीय लोगों के बीच उनका व्यापार तेजी से बढ़ने लगा।

1912 में बाटा ने मशीनों से जूता बनाना शूरू किया

मांग को देखते हुए साल 1912 तक, बाटा ने जूते बनाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और इस काम के लिए उन्होंने 600 से अधिक लोगों को नौकरी भी दी थी। लेकिन, पहले विश्व युद्ध के बाद, अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ गई। इसके कारण उनके उत्पादों की माँग काफी गिर गई और बाटा को उत्पादन में कटौती करनी पड़ी।

1930 में कंपनी ने भारतीय बाजार में प्रवेश किया

इसके बाद थॉमस ने इस संकट से उबरने के लिए जूते की कीमतों को आधा कर दिया। इससे उनकी माँग तेजी से बढ़ी और उन्हें अपने बिजनेस को दूसरे देशों में भी बढ़ाने का मौका मिला। 1924 तक, बाटा की पूरी दुनिया में 112 शाखाएँ थीं। अंततः कंपनी ने 1930 के दशक में भारतीय बाजार में प्रवेश किया और कोलकाता में अपने पहले उत्पादन इकाई की शुरुआत की।

कंपनी के आने के बाद बाटानगर की हुई स्थापना

फोर्ब्स के एक लेख के अनुसार, 1930 के दशक में, भारत में कोई जूता कंपनी नहीं थी और यहाँ जापानी कंपनियों का बोलबाला था। लेकिन, 1932 में, जब बाटा ने कोलकाता से सटे कोन्नार नाम के एक छोटे से गाँव में अपनी इकाई शुरू की, तो चीजें बदलने लगीं। इसके दो वर्षों के भीतर, बाटा के जूतों की माँग इतनी बढ़ गई कि उत्पादन स्थल को दोगुना करना पड़ा। और, यह एक टाउनशिप बन गया, जिसे लोग बाटानगर के नाम से पुकारते थे। कंपनी के नाम चार अक्षर के हैं इस कारण से यह भारत में काफी पॉपुलर हुआ और समय गुजरने के साथ लोगों को लगने लगा कि यह भारतीय कंपनी है।

भारत में इसके 1300 से अधिक स्टोर हैं

बाटा का मुख्यालय स्विट्जरलैंड में है और यह आज भारत में एक प्रमुख ब्रांड है, जो पूरी दुनिया में जूते का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। 126 साल पुरानी इस कंपनी के भारत में 1300 से अधिक स्टोर हैं।

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