Bank Loan: बैंक दिवालिया हो जाए तो Loan का क्या होता है, क्या वहां से लिया गया कर्ज माफ कर दिया जाता है?

Bank Loan

Bank Loan: अगर कोई बैंक अपने आप को दिवालिया घोषित करता है, तो उसके खाताधारकों के जमा धन की निकासी पर रोक लगा दी जाती है। ऐसे कई मामले आएं जब खाता धारकों का पैसा डूबा है। वहीं कुछ मामले में कुल जमा धन का 25% या 50% धन दिया जाता है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या दिवालिया बैंक की स्थिति में जो फार्मूला सेविंग खाते या फिक्स डिपॉजिट पर लगाया जाता है क्या वहीं फार्मूला होम लोन या कार लोन की रिकवरी पर भी लगाया जाता है? यानी बैंक के दिवालिया घोषित होने पर क्या पूर्व में उस बैंक से लोन लेने वाले व्यक्ति का कर्ज माफ कर दिया जाता है?

बैंक दिवालिया कैसे हो जाता है?

बैंक के दिवालिया होने को तकनीकी रूप से इनसॉल्वेंसी कहते हैं। इन्सॉल्वेंसी (Insolvency) तब होती है जब किसी बैंक की संपत्ती उसकी लायबिलिटी से कम होती है। बता दें कि बैंकों का प्रमुख दायित्व ग्राहकों के जमा धन की जिम्मेदारी है। बैंक लोन देने के साथ अपने पास कुछ मात्रा में कैश भी रखता है, जिससे कभी-कभी होने वाली निकासी के लिए अपने जमाकर्ताओं की मांगों को पूरा कर सके। यदि बैंक की कुल संपत्ति उसकी देनदारियों से अधिक हो जाएगी, तो बैंक लाभ कमा रही है। हालांकि, अगर कुछ लोग बैंक से लिए गए लोन को चुकाने में विफल हो जाते हैं और बैंक इस राशि की वसूली नहीं कर पाती है तो ये बैंकिंग टर्म में ‘बैड लोन’ कहलाते हैं, इसके चलते बैंक की परिसंपत्तियां उसकी देनदारी से नीचे चली जाती हैं और इस कारण ही बैंक दिवालिया होने की कगार पर पहुंच जाते हैं।

दिवालिया होने के बाद बैंक का क्या होता है

अब दिवालिया होने के स्थिति में ये जाहिर है कि देय राशि, सम्पत्तियों से अधिक है। इसका आशय यही हुआ कि बैंक अपनी देयताओं को चुकाने में असफल है। ऐसे में बैंक के लेनदार बैंक को खरीद लेंगे, और उनकी सम्पत्तियों को बेच कर अपने लोन की भरपाई करेंगे।

दिवालिया होने पर लोन की वसूली कौन करता है

चूंकि बैंक के पास सम्पत्तियों के तौर पर अन्य निवेश के अलावा अचल संपत्ति है जिन्हें बेच कर नकद धन उगाही कि जा सकती है लेकिन इसके साथ बैंक की मुख्य सम्पत्ति के रूप में ब्याज कमाने के लिये दिए गए लोन होते हैं जो अनेक छोटे बड़े ग्राहकों को दिए जाते हैं। इन ग्राहकों से लोन की राशि की उगाही सरल प्रक्रिया नहीं। क्योंकि वे लोन एक एग्रीमेंट के तहत दिए गए हैं। इस प्रकार उन लोन के चुकाने की तिथि तय है और तय तिथियों में ही वसूली होगी। ऐसे स्थिति में दिवालिया बैंक, दूसरे बैंक को लोन बेच देती है।

लोन तो चुकाना पड़ेगा

यानि साफ है कि अगर आपने दिवालिया हो चुके बैंक से लोन लिया था तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप लोन नहीं भरेंगे। हां, ये हो सकता है कि कुछ समय तक आप EMI भरने से छूटकारा पा सकते हैं। लेकिन ये कतई नहीं है कि आप लोन चुकाने के दायित्व से मुक्त हो जाएंगे। पेपर वर्क होने के बाद दूसरा बैंक आप से लोन वसूल लेगा।

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