Balasore Train Accident: दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, मां को है अपने बेटे का इंतजार, हादसे की मार्मिक कहानियां

अब तक 261 लोगों की जानें चली गई है। वहीं पर हादसे के बीच से कुछ कहानियां और मृतकों के परिजनों की कहानियां सामने आ रही है जिसे सुन आखें नम कर जाए।

Balasore Train Accident: दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, मां को है अपने बेटे का इंतजार, हादसे की मार्मिक कहानियां

ओडिशा।  Balasore Train Accident 2 जून की शाम को हुए दिल दहला देने वाले हादसे से मौतों का मंजर जहां पर थमने का नाम नहीं ले रहा है वहीं पर अब तक 261 लोगों की जानें चली गई है। वहीं पर हादसे के बीच से कुछ कहानियां और मृतकों के परिजनों की कहानियां सामने आ रही है जिसे सुन आखें नम कर जाए।

बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

पश्चिम बंगाल: बालासोर रेल दुर्घटना में बालीघाट पुरवापारा ग्राम पंचायत क्षेत्र के धनगरा के एक निवासी की मृत्यु हो गई। मृतक की मां ने कहा, "मेरे बेटे की कल बालासोर रेल दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वह चेन्नई जाने के लिए घर से निकला था। उसकी उम्र 26 साल थी, उसके दो बच्चे थे, उनके सिर से पिता का साया उठ गया।"

मां कर रही अपने बेटे का इंतजार

पश्चिम बंगाल: बालासोर रेल हादसे में गाव गंगारामपुर क्षेत्र के एक निवासी की मृत्यु हो गई। एक स्थानीय ने बताया, "हमारे यहां से दो लोग नितिन राय और चंदन राय कोरोमंडल एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे थे। हमें जब रेल दुर्घटना की खबर मिली तब हमने फोन किया, उस समय नितिन का फोन ऑन था। एक अन्य व्यक्ति ने फोन उठाकर बताया कि नितिन की दुर्घटनास्थल पर मृत्यु हो चुकी है। दुर्घटना के बाद से चंदन राय से कोई संपर्क नहीं हो पाया है।"

नींद खुली तो हुआ लाशों से सामना

यहां हादसे के के दौरान मौजूदा स्थिति को लेकर बचे एक यात्री ने बताया कि,  हम S5 बोगी में थे और जिस समय हादसा हुआ उस उस समय मैं सोया हुआ था। तेज आवाज से मेरी नींद खुली। मैंने देखा कि ट्रेन पलट गई है। मेरी सीट ऊपर वाली थी, मैं वहां पंखा पकड़ कर बैठा रहा। ट्रेन में भगदड़ मच गई थी। लोग बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे।हमने देखा कि वहां मरे हुए लोग पड़े हैं जिसमें किसी का हाथ नहीं है, किसी का पैर नहीं है। तब तक कोई बाहरी व्यक्ति मदद के लिए नहीं आ पाया था। ट्रेन से बाहर निकलकर लोग ही एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। अच्छी बात ये थी कि हमारी सीट के नीचे एक 2 साल का बच्चा था, जो बिल्कुल सुरक्षित था।

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