Bahubali Brijesh Sing : वो बाहुबली जिसकी गोली से भी कांपा दाऊद! जुर्म से सफेद पोशाक का सफर

Bahubali Brijesh Sing : वो बाहुबली जिसकी गोली से भी कांपा दाऊद! जुर्म से सफेद पोशाक का सफर

Up Bahubali Brijesh Sing : खून से सने हाथ, जुर्म की दुनिया में बनाई अपनी पहचान, फिर लगा रास्ता लंबा है, इसलिए पहन ली राजनीति की सफेद पोशाक तो कहलाए बाहुबली। जी हां आज हम बात करने वाले यूपी के उस बाहुबली नेता की जिसकी गोली से भी कांपता है दाऊद! वो बाहुबली कोई और नहीं बल्कि यूपी का ताकतवर नेता बृजेश सिंह है, जिन्होंने जुर्म की दुनिया से सफेद पोशाक तक का सियासी सफर तय किया। अपराध की दुनिया से राजनीति में एंट्री मारने वाले बृजेश की कहानी बिल्कुल फिल्मी है। पहले शिक्षा, फिर जुर्म की दुनिया में कदम और जब रास्ता लंबा लगा तो पहन ली राजनीति की सफेद पोशाक और बनाई अपनी अलग पहचान...

इस ताकतवर नेता का जन्म वाराणसी के धौरहरा गांव में हुआ था। बृजेश सिंह बचपन में तेज तर्रार थे, पढ़ाई में भी बेहद तेज थे। लेकिन कॉलेज में आते-आते उन्होंने अपराध की दुनिया में कदम क्या रखा, कि पूरा का पूरा पूर्वाचल ही हिला के रख दिया। आखिर एक होनहार बालक कैसे जुर्म की दुनिया का बादशाह बना, इसके लिए हमे इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। बात उस समय की है जब बृजेश सिंह बनारस की गलियों में घूमा करते थे, वह एक कॉलेज में अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। एक दिन जब वह कॉलेज में थे तो उन्हें सूचना मिली की उनके पिता की हत्या कर दी गई है। बृजेश के पिता को कुछ दबंगों ने जमीन के विवाद के चलते मार दिया था। पिता की हत्या की बात बृजेश सिंह के दिमाग में बैठ गई और यहीं से उन्होंने रखा जुर्म की दुनिया में कदम....

7 हत्याओं में जेल पहुंचा बृजेश

बृजेश सिंह ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने की ठान ली थी। उन्होंने अपने पिता के हत्यारे हरिहरन सिंह को मौत के घाट उतार दिया। बृजेश सिंह का यह पहला अपराध था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था की एक अपराध उन्हें जुर्म की दुनिया का सरताज बना देगा। साल 1986 में चंदौली के सिकरौर गांव में ग्राम प्रधान समेत 7 लोगों की हत्या के मामले में बृजेश सिंह का नाम आता है। मामले में पुलिस बृजेश को गिरफ्तार भी कर लिया था। क्योंकि घटना में बृजेश के पैरों में गोली लगी थी, वह घायल हो गया था। इस मामले में बृजेश सिंह पहली बार जेल गए थे। जेल में बृजेश सिंह की मुलाकात त्रिभुवन सिंह से हुई, उन दिनों पूर्वांचल में त्रिभुवन सिंह का डंका बजता था। दोंनो में इतनी गहरी मित्रता हो गई की दोनों की गाड़ी तेजी से एक साथ भागने लगी।

जेल से फरार हुआ बृजेश सिंह

कुछ समय जेल में रहने के बाद एक दिन बृजेश सिंह जेल से फरार हो गया और जा पहुंचा मुंबई। बताया जाता है कि मुंबई पहुंचकर बृजेश सिंह ने दाऊद से मुलाकात की थी। कहते है बृजेश सिंह ने दाऊद के कहने पर अरूण गवली के चार गुर्गो को गोलियों से भून दिया था। इस कांड के बाद बृजेश सिंह दाऊद के करीब आ गया। बृजेश सिंह का मुंबई में इतना आतंक बढ़ गया कि महाराष्ट्र सरकार को बृजेश सिंह पर मकोका कानून लगाना पड़ा।

बृजेश के नाम से डरने लगे लोग

बृजेश सिंह अपराध की दुनिया में माहिर हो चुका था। लोग उसे थरथर कांपने लगे थे। वही मुख्तार अंसारी अपराध की दुनिया में कदम रख रहा था। दोनों के बीच अपनी ताकत बताने की जंग शुरू हो गई। और तरीका था सरकारी ठेकों पर कब्जा करना। सरकारी ठेकों को लेकर कई बार मुख्तार और बृजेश सिंह के बीच गैंगवार हुई। लेकिन बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह अपनी ताकत बढ़ाते रहे। बृजेश सिंह से बदला लेने के लिए मुख्तार ने राजनीति में हाथ आजमाया और 1996 में विधायक बना। वही बृजेश सिंह ने भी मुख्तार को रास्ते से हटाने का प्लान बना डाला। जब साल 2001 में मुख्तार का काफिला गाजीपुर से गुजर रहा था तो उनके काफिले पर जानलेवा हमला हुआ। ये हमला बृजेश सिंह ने किया था। बृजेश सिंह और उसकी गैंग ने मुख्तार के काफिले पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई। हालांकि इस हमले में मुख्तार बच निकला। वही हमले में बृजेश सिंह भी बुरी तरह से घायल हो गया।

कहते है कि इस कांड के बाद खबरे आई की बृजेश सिंह की मौत हो गई, कई दिनों तक बृजेश सिंह यूपी में नजर नहीं आया। बताया यह भी जाता है कि बृजेश सिंह ने मुख्तार से दूरियां बना ली थी। उनके ऊपर 5 लाख का ईनाम भी रखा दिया गया था। लेकिन बृजेश भले ही यूपी में नहीं हो लेकिन उसकी गैंग अपना काम कर रही थी। बृजेश दूर से ही अपनी गैंग को हैंडिल करने लगा। साल 2008 में बृजेश सिंह को भुवनेश्वर से गिरफ्तार कर लिया गया। अब बृजेश सिंह जेल की हवा खा रहे थे। लेकिन बृजेश के नाम का डंका बजता रहा। बृजेश राजनीति की ताकत समझ चुका था। इसलिए साल 2010 में उसने अपनी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह को BSP से MLCका चुनाव लड़वाया और चुनाव जीता।

जेल में रहकर बना विधायक

साल 2016 में बृजेश सिंह ने खुद राजनीति की सफेद पोशाक पहनने की ठानी। बृजेश ने जेल में रहकर ही निर्दलीय एमएलसी का चुनाव लड़ा। चुनाव में बृजेश सिंह को बीजेपी ने समर्थन दिया और चुनाव में जीत दर्ज की। चुनाव जीतने के बाद बृजेश सिंह अपराधी से नेता कहलाने लगे। 13 साल बाद बृजेश सिंह वाराणसी जेल से बाहर आ गया। बता दें कि यूपी के बाहुबली नेताओं में में बृजेश सिंह का नाम बाता है। अभी फिलहाल बृजेश सिंह की पत्नी विधायक है। वही उनका भतीजा सुशील सिंह भी विधायक हैं। इसके पहले उनके पिता और बृजेश सिंह के भाई चुलबुल सिंह बीजेपी से एमएलसी रह चुके हैं। बृजेश सिंह बीजेपी के कद्दाव नेताओं में से एक माने जाते है।

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