Azim Premji: जानिए कैसे वेजिटेबिल ऑयल और साबुन का कारोबार करते-करते आईटी उद्योग के सम्राट बन गए

Azim Premji

Azim Premji: भारत के सबसे बड़े दानवीर और विप्रो के संस्थापक और फाउंडर अजीम प्रेमजी को कौन नहीं जानता। उनकी समाज के प्रति दरियादिली और सोसाइटी के प्रति किए गए कामों की खूब मिसाल दी जाती है। वैसे तो सीएसआर यानी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी के तहत कई बड़े कॉरपोर्ट घराने एक निश्चित रकम सामाज कल्याण के लिए देती हैं। लेकिन अजीम प्रेमजी ऐसे शख्स हैं जो इस नेक काम को तब से कर रहे हैं जब ऐसा करने की कोई बाध्यता नहीं थी।

आईटी उद्योग सम्राट के रूप में जाने जाते हैं

अजीम प्रेमजी को अनौपचारिक रूप से भारतीय आईटी उद्योग के सम्राट के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा वे परोपकार के मामले में विश्व प्रसिद्ध हैं। अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई में हुआ था। उनका पूरा नाम अजीम हाशिम प्रेमजी है। उनके पिता हाशिम प्रेमजी भी एक नामी बिजनेसमैन थे जिन्हें बर्मा के चावल किंग के तौर पर जाना जाता था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय मोहम्मद अली जिन्ना ने उनके पिता हाशिम प्रेमजी से पाकिस्तान चलने को कहा था, पर हाशिम प्रेमजी ने मना कर दिया।

जिन्ना चाहते थे कि वे पाकिस्तान आ जाए

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिन्ना उन्हें पाकिस्तान का पहला वित्त मंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने भारत में ही रहना पसंद किया और यहीं अपने कारोबार को बढ़ाने का निर्णय लिया। पिता के सफल कारोबारी होने के चलते अजीम प्रेमजी के पास कभी पैसों की कमी नहीं हुई। उन्होंने अमेरिका के कैलोफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री ली। हालांकि, अगस्त 1966 में उन्हें अपने पिता की मृत्यु के बाद वापस भारत लौटना पड़ा।

21 वर्ष की उम्र में पिता का निधन

उस वक्त अजीम प्रेमजी महज 21 वर्ष के थे। लेकिन उन्होंने अपने पिता की छोड़ी विरासत को इस तरह बढ़ाया कि वो उद्योग जगत के लिए एक मिसाल बन गए। बता दें कि विप्रो शुरूआत में साबुन और वेजिटेबिल ऑयल के कारोबार में थी पर 1970 के दशक में अजीम प्रेमजी ने अमेरिकन कंपनी सेंटिनल कंप्यूटर कॉर्पोरेशन के साथ हाथ मिलाया और उसके बाद उनकी कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अजीम प्रेमजी ने 1980 में विप्रो को आईटी कंपनी के तौर पर इंड्रोड्यूस कराया और कंपनी पर्सनल कंप्यूटर बनाने के साथ सॉफ्टवेयर सर्विसेज भी प्रोवाइड कराने लगी। इसके बाद ही अजीम प्रेमजी ने अपनी कंपनी का नाम बदलकर विप्रो (WIPRO) कर दिया था।

अजीम प्रेमजी को मिले हुए सम्मान

अजीम प्रेमजी को साल 2005 में भारत सरकार ने व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया था और साल 2011 में उन्हें पद्म विभूषण प्रदान किया गया जो भारत सरकार का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। साल 2010 में वो एशियावीक द्वारा दुनिया के 20 सबसे शक्तिशाली पुरुषों में से एक चुने गए थे। वो दो बार यानी साल 2004 और 2011 में टाइम मैगजीन के दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल रहे हैं। वर्ष 2000 में, उन्हें मणिपाल अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन द्वारा मानद डॉक्टरेट दिया गया।

साल 2006 में, अजीम प्रेमजी को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, मुंबई द्वारा लक्ष्मी बिजनेस विजनरी से सम्मानित किया गया था। साल 2009 में, उन्हें अपने उत्कृष्ट परोपकारी काम के लिए मिडलटाउन, कनेक्टिकट में वेस्लेयन विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया था। साल 2013 में, उन्हें ईटी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला और इसके अलावा साल 2015 में, मैसूर विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टरेट प्रदान किया, वहीं अप्रैल 2017 में, इंडिया टुडे पत्रिका ने उन्हें साल 2017 के भारत के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों की लिस्ट में 9 वां स्थान दिया था।

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password