पुलिस कस्टडी में आरोपी से मारपीट: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने TI समेत पूरे स्टाफ पर लगाया 1 लाख 20 हजार का जुर्माना

MP High Court: पुलिस कस्टडी में एक आरोपी से मारपीट के मामले में हाईकोर्ट ने TI समेत पूरे स्टाफ पर एक लाख 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

Assault with an accused in police custody Madhya Pradesh High Court imposed fine on the police station staff hindi news

MP High Court: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कस्टडी में एक आरोपी से मारपीट के मामले में संज्ञान लिया। हाईकोर्ट ने TI समेत पूरे स्टाफ पर एक लाख 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही DGP को निर्देश दिए हैं कि TI समेत थाने के सभी पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर वर्तमान थाने से 900 किलोमीटर दूर किया जाए। कोर्ट ने प्रदेश के पुलिस थानों के हर कमरे में ऑडियो सुविधा के साथ CCTV कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए हैं।

'सभी पुलिस अधीक्षकों से रिपोर्ट लें DGP'

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जस्टिस जीएस आहलूवालिया की एकलपीठ ने DGP को कहा कि वे राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों से रिपोर्ट प्राप्त करें। इस मामले में किसी भी तरह की चूक पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। DGP हर जिले के हर पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट तुरंत मंगाकर सुनिश्चित करें कि क्या उनके जिले के पुलिस स्टेशनों के भीतर कोई कमरा या स्थान ब्लैक स्पॉट यानी सीसीटीवी कैमरे के बिना तो नहीं है।

एक कंपनी के मैनेजर ने लगाई थी याचिका

अनूपपुर के रहने वाले अखिलेश पांडे ने कोर्ट में याचिका लगाई थी कि उन्हें फर्जी अपराध में गिरफ्तार किया गया। याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक पांडे ने दलील दी कि याचिकाकर्ता एक कंपनी का मैनेजर है। अनूपपुर के भालूमाड़ा थाने की पुलिस उससे 5 हजार रिश्वत मांग रही थी। राशि नहीं देने पर फर्जी केस बनाया गया। थाने में मारपीट की गई।

एक पुलिसकर्मी ने स्वयं अपनी वर्दी फाड़ी और दोष याचिकाकर्ता पर लगा दिया। RTI से मिले CCTV फुटेज देखने के बाद सच्चाई सामने आई। इसके बाद हाईकोर्ट पुलिसकर्मियों पर एक लाख 20 हजार का जुर्माना लगा दिया। ये पूरी राशि याचिकाकर्ता को हर्जाने के तौर पर मिलेगी।

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18 फरवरी 2025 तक पेश करें रिपोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) ने DGP को निर्देश दिए हैं कि वे मध्यप्रदेश के सभी पुलिस थानों में हर जगह पर CCTV कैमरे लगाने के बारे में अपनी रिपोर्ट 18 फरवरी, 2025 तक पेश करें। अगर रिपोर्ट पेश नहीं की जाती है तो इस न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल इस बारे में रिपोर्ट पेश करेंगे। इसके साथ ही अदालत की अवमानना के लिए एक अलग मामला दर्ज किया जाएगा। हाईकोर्ट के आदेश की एक प्रति पुलिस महानिदेशक को आवश्यक जानकारी और अनुपालन के लिए तत्काल भेजी जाए।

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