Asirgarh Fort: 5 हजार सालों से ‘अश्वत्थामा’ इस मंदिर में सबसे पहले चढ़ाते हैं फूल, घाव भरने के लिए लोगों से मांगते हैं हल्दी और तेल!

Asirgarh Fort

भोपाल। मप्र अपनी सांस्कृतिक विरासत और मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं जो देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि महाभारत के योद्धा अश्वत्थामा रोज शिवलिंग पर फूल चढ़ाने आते है। बुरहानपुर स्थित असीरगढ़ किले की शिवमंदिर जहां अस्वत्थामा प्रतिदिन सबसे पहले पूजा करने आते हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि पिछले पांच हजार सालों से अश्वत्थामा की आत्मा यहां भटक रही है। लोग जब भी सुबह यहां पूजा करने के लिए आते हैं तो उन्हें पहले से ही फूल एवं गुलाल भगवान शिव पर चढ़ा मिलता है।

भगवान श्रीकृष्ण ने श्राप दे दिया था

कहा जाता है कि अश्वत्थामा का वजूद आज इस मंदिर में मौजूद है। दरअसल, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वत्थामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें युगों-युगों तक भटकने का श्राप दे दिया था। इसी के चलते कहा जाता है कि पिछले लगभग 5 हजार वर्षों से अश्वत्थामा असीरगढ़ किले में भटक रहे हैं।

अश्वत्थामा को देखने पर मानसिक स्थिति हो जाती है खराब

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किमी दूर असीरगढ़ का किला है। स्थानीय लोग कहते हैं कि इस किले में स्थित शिव मंदिर में अश्वत्थामा आज भी पूजा करने आते हैं। स्थानीय निवासी अश्वत्थामा से जुड़ी कई कहानियां सुनाते हैं। वे बताते हैं कि अश्वत्थामा को जिसने भी देखा, उसकी मानसिक स्थिति हमेशा के लिए खराब हो गई। इसके अलावा कहा जाता है कि अश्वत्थामा पूजा से पहले किले में स्थित तालाब में नहाते भी हैं।

लोगों से मांगते हैं हल्दी और तेल

बुरहानपुर के अलावा मप्र के ही जबलपुर शहर के गौरीघाट (नर्मदा नदी) के किनारे भी अश्वत्थामा के भटकने का उल्लेख मिलता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कभी-कभी वे अपने मस्तक के घाव से बहते खून को रोकने के लिए हल्दी और तेल की मांग भी करते हैं। हालांकि इस संबंध में आज तक कुछ भी स्पष्ट और प्रामाणिक तथ्य नहीं मिला है।

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