अष्टमी-नवमीं तिथि को लेकर न हों कंफ्यूज: यहां देखें अक्टूबर में कब है संधी पूजा, ये क्यों होती है जरूरी

Ashtami-Navmi Tithi 2024: अगर आप भी महा अष्टमी और नवमीं की तिथि को लेकर कंफ्यूज हैं, तो आपको बताते हैं कि ज्योतिषाचार्य के अनुसार महा अष्टमी और नवमीं की सही तिथि क्या है।

Ashtami-Navmi-Tithi-2024-ki-Sahi-Date

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Ashtami-Navmi 2024 ki Sahi Tithi Kya Hai: तिथियों के घटने बढ़ने के कारण इस साल शारदीय नवरात्रि पूरे नौ दिन की और दसवें दिन दशहरा हैं। इस बार पंचमी तिथि दो दिन रही।

इसके बाद अगर आप भी महा अष्टमी और नवमीं की तिथि को लेकर कंफ्यूज हैं तो चलिए हम आपको बताते हैं कि ज्योतिषाचार्य और हिन्दू पंचांग के अनुसार महा अष्टमी और नवमीं की सही तिथि क्या है।

इस दिन से शुरू हुई थीं शारदीय नवरात्रि

ज्योतिष्ज्ञाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्टूबर गुरुवार को हुई थी। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिन की हैं। ​इसमें पंचमी तिथि दो दिन आई है। सोमवार और मंगलवार यानी 7 और आठ अक्टूबर को दो दिन आई है। तो वहीं अष्टमी और नवमीं तिथि एक ही दिन आ रही है।

अष्टमी और नवमीं तिथि कब है

हिन्दू पंचांग लोक विजय के अनुसार इस बार महा अष्टमी और नवमीं तिथि 11 अक्टूबर शुक्रवार को आ रही है।

कब कर पाएंगे कुल देवी पूजा

यदि आपके घर में सप्तमी पूजन होता है तो आप इसकी पूजा 10 अक्टूबर को कर पाएंगे। तो वहीं यदि आपके कुटुंब में अष्टमी या नवमीं को कुल देवी-देवता की पूजा होती है तो इसके लिए आप 11 अक्टूबर की तिथि सही बताई जा रही है।

क्यों होती है कुल देवी की पूजा

दुर्गाष्टमी पर कई लोग कुल देवी का पूजन करते हैं। सबकी अपनी परंपरा अनुसार सप्तमी, अष्टमी और नवमीं पर भी होता है लेकिन अधिकतर घरों में अष्टमी पूजन किया जाता है। पंडित राम गोविन्द शास्त्री के अनुसार कुल देवी वंश को आगे बढ़ाने वाली होती हैं। इसलिए इस वंश वृद्धि घर के लिए, कुल की सलामती के लिए कुल देवी का पूजन किया जाता है।

यह रही दुर्गा अष्टमी की कथा

कथा अनुसार दो राक्षसों शुंभ और निशुंभ द्वारा देवताओं को हराए जानें के बाद देवलोक पर आक्रमण कर दिया गया। इसके बाद चंड व मुंड सेनापतियों को भेजा गया। तब इसी दिन यानी अष्टमी पर इस दौरान देवताओं की प्रार्थना पर मां पार्वती द्वारा देवी चंडी की रचना की गई। तब मां चंडी ने चंड और मुंड का वध किया। इसी दौरान मां पार्वत द्वारा चंडी देवी को चामुंडा नाम दिया गया।

इन शक्तियों की होती है पूजा

महाअष्टमी पूजन का हमारे धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन मां के 64 योगिनियों, मां के 8 रूपों यानि मां की अष्ट शक्तियों की पूजा की जाती है। मां के विभिन्न रूपों में मां की विभिन्न शक्तियाँ का स्वरूप झलकता है। इस दौरान मां ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वारही, नरसिंही, इंद्राणी और चामुंडा आठ शक्तियों की पूजा की जाती है।

संधि पूजा का है खास महत्व

अष्टमी पूजन पर संधि पूजा का विशेष महत्व है। संधि जैसे नाम से ही स्पष्ट है जब दो तिथियों का मिलन होता है। उसे संधि कहते हैं। इसी तरह जब अष्टमी तिथि समाप्त होती है और नवमी तिथि शुरू होती है। उस समय को संधि पूजा कहते हैं। इसी समय पर संधि पूजा की जाती है। ये पूजा इसलिए खास मानी जाती है कि इस संधि के दौरान ही देवी चामुंडा माता ने चंड और मुंड राक्षसों का वध किया था।

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