PM के दौरे से पहले आशा-ऊषा संगठन की अध्यक्ष नजरबंद: 12 घंटे तक निगरानी में रहीं, बेडरूम तक में पुलिस, सामने आई ये वजह

Asha Worker leader House Arrest: भोपाल में पीएम मोदी के महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम में शामिल होने जा रहीं आशा संगठन की प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी कौरव को ग्वालियर में पुलिस ने नजरबंद कर दिया। जानिए पूरा मामला।

PM के दौरे से पहले आशा-ऊषा संगठन की अध्यक्ष नजरबंद: 12 घंटे तक निगरानी में रहीं, बेडरूम तक में पुलिस, सामने आई ये वजह

Asha Worker leader House Arrest:  भोपाल में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में देशभर से महिला संगठनों की कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था, लेकिन भिंड जिले के दबोह कस्बे की रहने वाली आशा/आशा सहयोगिनी श्रमिक संगठन की प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी कौरव को कार्यक्रम में शामिल होने से पहले ही ग्वालियर में नजरबंद कर दिया गया।

आधी रात को पहुंची पुलिस, दोपहर तक रखा नजरबंद

[caption id="attachment_829213" align="alignnone" width="769"]publive-image लक्ष्मी कौरव को ग्वालियर में पुलिस ने किया नजरबंद[/caption]

लक्ष्मी कौरव शुक्रवार को अपने घर दबोह से ग्वालियर पहुंचीं थीं और दीनदयाल नगर स्थित अपने रिश्तेदार के घर पर ठहरी हुई थीं। उन्हें शुक्रवार रात 1 बजे भोपाल के लिए ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन रात करीब 12 बजे पुलिस उनके घर पहुंच गई और उन्हें नजरबंद कर दिया।

लक्ष्मी का कहना है कि पुलिस ने उन्हें एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ा। यहां तक कि वॉशरूम और बेडरूम तक में महिला पुलिस मौजूद रही। शनिवार दोपहर 12 बजे तक पुलिस उनके घर के अंदर ही मौजूद रही, बाद में घर के बाहर तैनाती जारी रही।

सरकार को डर था कि मैं असली मुद्दे उठा दूंगी

[caption id="attachment_829214" align="alignnone" width="779"]publive-image संगठन की प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी कौरव नजरबंद रहीं।[/caption]

लक्ष्मी कौरव का कहना है कि वह भोपाल में प्रधानमंत्री से आशा और आशा सहयोगिनी कार्यकर्ताओं के स्थायित्व, सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बात करना चाहती थीं। लेकिन सरकार ने उन्हें रोक दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि, “प्रधानमंत्री सिर्फ अपनी मन की बात सुनाते हैं। जब जमीनी महिलाएं अपनी बात रखना चाहें तो सरकार डर जाती है। महिला सशक्तिकरण का मतलब यह नहीं कि भाषण में बातें हों, असली सशक्तिकरण तब है जब हमें बोलने दिया जाए।”

“कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया, उल्टा रोका गया – क्या यही महिला सशक्तिकरण है?”
लक्ष्मी ने सवाल उठाया कि जब महिला सशक्तिकरण की बात की जा रही है तो जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को इस कार्यक्रम से क्यों दूर रखा गया? उन्होंने कहा, “मुझे बुलाया नहीं गया, उल्टा नजरबंद किया गया। क्या यही महिला सशक्तिकरण है?”

[caption id="attachment_829213" align="alignnone" width="772"]publive-image ग्वालियर में उनके निवास के बाहर पूरी रात एक पुलिस कॉन्स्टेबल तैनात रहा।[/caption]

नजरबंदी का वीडियो भी किया जारी

लक्ष्मी कौरव ने एक वीडियो जारी कर अपनी नजरबंदी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कई बार भोपाल आए, लेकिन उन्हें न तो कभी बुलाया गया और न ही वह अपनी बात रख सकीं।

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