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Arun Yadav: कांग्रेस के लिए इतने अहम क्यों हैं अरुण यादव, जानिए उनके राजनीतिक सफर की कहानी

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Bansal Digital Desk
Arun Yadav: कांग्रेस के लिए इतने अहम क्यों हैं अरुण यादव, जानिए उनके राजनीतिक सफर की कहानी

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरूण यादव (Arun Yadav) आज अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म आज ही के दिन 15 जनवरी 1974 खरगोन में हुआ था। कहा जाता है कि इन्हें सियासत विरासत में मिली। लेकिन इन्होंने जनता के दिल में जगह अपने सौम्य स्वभाव के कारण बनाया। अरूण यादव के पिता सुभाष यादव (Subhash Yadav) भी कांग्रेस के बड़े नेता थे।

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अपने पिता के उलट हैं अरूण यादव

सुभाष यादव की गिनती मध्य प्रदेश के उन नेताओं में होती थी जो अपने अक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते थे। पार्टी के साथ-साथ उनका अपना जनाधार था। यही कारण है कि कांग्रेस ने उन्हें मध्य प्रदेश का उपमुख्यमंत्री भी बनाया था। वहीं अपने पिता के उलट अरूण यादव बेहद शांत स्वभाव के माने जाते हैं। जनता उन्हें इस स्वभाव के कारण ही पसंद करती है।

इनका अपना जनाधार है

अरूण यादव पिता के कहने पर राजनीति में आए थे। उन्होंने साल 2007 में पहली बार खरगोन संसदीय सीट के उपचुनाव लड़ा और जीतकर सांसद बने। यादव केंद्र में मंत्री भी रहे और प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष की कमान भी संभाल चुके हैं। पिता की तरह इनका भी अपना एक जनाधार है। जानकार मानते हैं कि उनके समर्थक प्रदेश के हर अंचल में हैं। यही कारण है प्रदेश कांग्रेस में उन्हें काफी अहम माना जाता है।

सियासी सफर

अरूण यादव का सियासी सफर साल 2007 से शुरू होता है। जब वे खरगोन लोकसभा सीट से उपचुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद साल 2009 में पार्टी ने उन्हें खंडवा से चुनाव लड़ाने के ऐलान किया था। इस चुनाव में उनके सामने थे भाजपा के कद्दावर नेता नंदकुमार सिंह चौहान। चौहान इस सीट पर 4 बार के सांसद थे। ऐसे में अरूण यादव के लिए इस सीट को जीतना इतना आसान नहीं था। हालांकि, चुनाव परिणाम ने सबको चौका दिया।

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दिग्गज नेता को हराकर बने केंद्रीय मंत्री

अरूण यादव ने भाजपा के दिग्गज नेता को हरा दिया था। पार्टी ने इसका इनाम भी उन्हें दिया और वे UPA-2 में केंद्रीय मंत्री बनाए गए। इसके बाद यादव प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी बने। अरूण यादव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उनके घर में टक्कर भी दे चुके हैं। उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव में सीएम शिवराज के खिलाफ बुधनी से चुनाव लड़ा था। हालांकि, वे इस चुनाव में हार गए थे।

कांग्रेस के लिए तटस्थ

अरुण यादव उन नेताओं में गिने जाते हैं, जो हर परिस्थिति के लिए तैयार रहते हैं। उनकी उपेक्षा को देखकर कई बार मीडिया में खबरें आईं कि अब अरुण यादव पार्टी से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन उन्होंने कभी भी कांग्रेस से दूरी नहीं बनाई। हाल ही में नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद यह माना जा रहा था कि कांग्रेस उन्हें खंडवा से अपना उम्मीदवार बनाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। यादव ने सामने से आकर कहा कि वे अपनी दावेदारी वापस लेते हैं।

छलका था दर्द

बुरहानपुर में आयोजित एक सभा में यादव ने कहा था कि 'कांग्रेस पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, पार्टी उन्हें हर बार जो निर्देश देती है वह उसका पालन करते हैं। हालांकि, इस बार उनका दर्द जरूर झलक गया था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि 'हर बार मैं फसल उगाता हूं, लेकिन उस फसल को काटकर कोई और ले जाता है'। 2018 में भी ऐसा ही हुआ था। 2018 में फसल मैंने उगाई, पार्टी आलाकमान ने कहा किसी और को दे दों तो मैंने अपनी फसल दे दी। क्योंकि फसल हम फिर उगा लेंगे।

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कांग्रेस के लिए इसलिए हैं अहम

अरूण यादव मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए अहम इसलिए भी हैं, क्योंकि वे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आते हैं। मध्य प्रदेश में OBC समाज की जनसंख्या काफी ज्यादा है। प्रदेश भाजपा के कई बडे़ नेता इस स

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