APEDA Rice Export Registration: गैर-बासमती चावल के निर्यात के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी, हर टन पर देनी होगी इतनी फीस

APEDA Rice Export Registration: भारत अब अपने गैर-बासमती चावल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंडिया ब्रांड के रूप में प्रमोट करने जा रहा है। सरकार ने इसके लिए निर्यातकों के लिए कॉन्ट्रैक्ट रजिस्ट्रेशन और शुल्क को अनिवार्य कर दिया है।

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हाइलाइट्स

  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक
  • गैर-बासमती चावल के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
  • निर्यात को मिलेगा इंडिया ब्रांड का प्रमोशन

APEDA Rice Export Registration:  भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है। देश से हर साल लाखों टन बासमती और गैर-बासमती चावल निर्यात होते हैं। लेकिन विदेशों में जब स्थानीय आयातक इन्हें पैक करते हैं, तो ये अपनी भारतीय पहचान खो देते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार ने अब गैर-बासमती चावल के निर्यात को इंडिया ब्रांड के रूप में प्रमोट करने के लिए एक नया कदम उठाया है।

सरकार ने गैर-बासमती चावल के निर्यात के लिए कॉन्ट्रैक्ट का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही रजिस्ट्रेशन पर 8 रुपये प्रति टन का शुल्क भी लगाया गया है। यह कदम भारत के चावल निर्यात को बढ़ावा देने और इसे विश्व स्तर पर इंडिया ब्रांड के रूप में पहचान दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

गैर-बासमती चावल निर्यातकों का समर्थन

देश के तीनों मुख्य गैर-बासमती चावल निर्यातक संघों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। छत्तीसगढ़ के द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश जैन ने बताया कि यह निर्णय सभी संबंधित लोगों की बैठक में सबकी सहमति से लिया गया था। 24 सितंबर को नोटिफिकेशन आने से पहले ही तीनों संघों ने अनुबंध पंजीकरण की योजना का समर्थन कर दिया था।

रजिस्ट्रेशन से क्या होगा फायदा?

सरकार ने पहले ही गैर-बासमती चावल के निर्यात के लिए APEDA के साथ पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इस कदम से:

निर्यात शिपमेंट पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा।

निर्यात नीति में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी।

बासमती और गैर-बासमती दोनों प्रकार के चावल के निर्यात में संतुलन स्थापित होगा।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इससे व्यापार पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। बस, निर्यातकों के लिए थोड़ी सी लागत बढ़ जाएगी। APEDA देश के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने का काम करता है। इसके तहत चावल, फल, सब्जियां, मांस और डेयरी उत्पाद शामिल हैं। APEDA निर्यातकों के लिए बाजार और बुनियादी ढांचे को भी विकसित करता है।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) की प्रतिक्रिया

IREF ने कहा कि APEDA के साथ गैर-बासमती चावल के शिपमेंट के लिए अनुबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करना निर्यात प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाएगा और सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार का यह कदम भारत के चावल निर्यात को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगा, और भारतीय चावल की पहचान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बनाए रखने में मदद करेगा।

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