Anxiety Disorder : भाई बहन ने यूपीएससी और नीट किया क्रैक : एंग्जायटी का ट्रीटमेंट बना लाइफ का टर्निंग पॉइन्ट

Anxiety Disorder : भाई बहन ने यूपीएससी और नीट किया क्रैक:एंग्जायटी का ट्रीटमेंट बना लाइफ का टर्निंग पॉइन्ट Anxiety Disorder: Siblings crack UPSC and NEET: Treatment of anxiety becomes the turning point of life/pds

Anxiety Disorder : भाई बहन ने यूपीएससी और नीट किया क्रैक : एंग्जायटी का ट्रीटमेंट बना लाइफ का टर्निंग पॉइन्ट

नई दिल्ली। मशहूर अमेरिकी लेखक Anxiety Disorder : और मोटिवेशनल स्पीकर liftstyle लियो बसकैगिला का मशहूर क्वोट health news है, ''चिंता आपके आने वाले कल को ही दुखों से खोखला नहीं करती है बल्कि ये अपनी ताकत से आपके आज को खत्म कर करती है।'' ऐसा कहा जाता है कि बढ़ते कॉम्पटीशन से युवाओं में तनाव बढ़ता है, वे मानसिक रूप से परेशान रहते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसा उदाहरण देने जा रहे हैं जहां पर एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण दो सगे भाई बहन प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी वास्तविक क्षमता से कमतर प्रदर्शन से निराश थे। लेकिन समय रहते उन्होंने बंसल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से इसका उपचार लिया और देश के कठिनतम एग्जाम क्रमशः सिविल सेवा और नीट पीजी में सफलता हासिल की।

27 वर्षीया अंकिता (परिवर्तित नाम) अपने मेडिकल पीजी कॉलेज में दाखिले की प्रवेश परीक्षा के पूर्व ही घबराहट ,दिल की धड़कन बढ़ना और अनिद्रा से परेशान थीं। योग, प्राणायाम,नींद की दवा भी काम नहीं करती थी। अंकिता के सगे 29 वर्षीय भाई अंकित (परिवर्तित नाम) सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे। मेंस एग्जाम के कुछ दिनों पहले से ही उनमें घबराहट बेचैनी अनिद्रा के लक्षण आने लगते थे,वे चैन से सो नहीं पाते थे और उनके प्रथम दो प्रयास व्यर्थ रहे।इस कारण से निराशा घर करने लगी।

क्या होते हैं एंग्जायटी के लक्षण —

  • घबराहट
  • बेचैनी
  • अनिंद्रा
  • आशंका
  • इंटरव्यू में ब्लैंक हो जाना
  • हाथ थरथराना
  • दिल की धड़कन बढ़ने लगना
  • मुंह सूखने लगना
  • चिंताओं से घिरे रहना
  • अपच

अन्य कारण —

  • अनुवांशिक
  • कठिन बचपन
  • तुलना
  • स्कूल में बुली
  • ब्रेन में न्यूरोट्रांसमीटर डिसबैलेंस

क्या कहते हैं आंकड़े - 
भारत के महानगरों में 15.20% लोग एंजायटी और 15.6% लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। महानगरों के करीब 50% लोग अपनी पूरी नहीं कर पाते। रिसर्च के मुताबिक 86% लोगों के रोगों का कारण है। जिसमें डिप्रेशन और एंग्जायटी प्रमुख हैं। विकसति देशों में करीब 18 प्रतिशत युवा एंग्जायटी से पीड़ित हैं। महिलाओं के इसमें आने की आशंका पुरुषों की अपेक्षा 60 प्रतिशत अधिक है। एक रिसर्च के अनुसार 8 प्रतिशत किशोर इससे पीड़ित हैं।

क्यों नहीं लेते लोग इलाज —

  • मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव।
  • उनके बारे में लोग क्या कहेंगे।
  • साइकियाट्रिक दवाओं के प्रति अभाव

क्या करें —

  • अपनों से संवाद करें।
  • स्वयं से कोई दवा का सेवन न करें।
  • लक्षणों को स्वीकार है।
  • दिनचर्या नियमित रखें।
  • नशे से बचें।
  • मनोचिकित्सक से मिलने में संकोच न करें।
  • उपचार उचित दवाओं और काउंसलिंग से प्रभावी इलाज संभव है।

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"यह केस एक आदर्श उदाहरण है कि कैसे एक साइकियाट्रिक डिसऑर्डर आपकी उत्पादकता को कम कर सकता है।यह सबसे ज्यादा देखा जाने वाला साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है,रोजाना ओपीडी में लगभग 60 प्रतिशत केसेस में एंग्जायटी रहती है।जागरूकता के अभाव और कलंक के भाव के चलते न जाने कितने भाई बहन इतनी बड़ी सफलता अर्जित कर सकते हैं लेकिन एंग्जायटी के चलते नहीं कर पाते।
*डॉ सत्यकांत त्रिवेदी ,सीनियर कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट,बंसल असपताल

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