Anti Paper Leak Law: परीक्षा पर केंद्र सरकार का सख्त कानून! पकड़े जाने पर होगी 10 साल की कैद; लगेगा करोड़ों का जुर्माना

Anti Paper Leak Law: परीक्षा में अनुचित साधन, संसाधन का इस्तेमाल करने के खिलाफ कड़ा कानून आज से लागू हो गया है।

Anti Paper Leak Law: परीक्षा पर केंद्र सरकार का सख्त कानून! पकड़े जाने पर होगी 10 साल की कैद; लगेगा करोड़ों का जुर्माना

Anti Paper Leak Law: शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) पेपर लीक के मामलों का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार ने परीक्षा से पहले पेपर लीक मामलों की रोकथाम के लिए शुक्रवार को एक सख्त कानून अधिसूचित किया।

इस कानून को लाने का मकसद परीक्षा में धोखाधड़ी को रोकना है। इस कानून के तहत पेपर लीक करने वाले आरोपियों को 10 साल की सजा के साथ 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा आरोपियों से ही परीक्षा की लागत भी वसूली जाएगी।

कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान की तरफ से कुछ दिन पहले कहा गया था कि कानून मंत्रालय परीक्षा से पहले पेपर लीक को रोकने के लिए एक नया कानून बना रहा है। वहीं, इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस साल फरवरी में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद यह कानून बन गया। बता दें कि इस कानून को 6 फरवरी को लोकसभा और 9 फरवरी को राज्यसभा में पारित कर दिया था।

Anti Paper Leak Law 2024

वहीं, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने अपनी भी अपनी अधिसूचना में कहा "सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 (1) की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार 21 जून, 2024 को उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होने की तारीख के रूप में नियुक्त करती है।"

सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली को रोकना

नए कानून के बनने के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के द्वारा आयोजित की जाने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं को परीक्षा से पहले पेपर लीक होने से रोकना है।

साथ ही परीक्षा में धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए इस अधिनियम के तहत उन्हें कम से कम पांच साल की कैद होगी, जबकि अवैध गतिविधि वाले अपराध करने वाले व्यक्ति को पांच से दस साल की कैद हो सकती है।

साथ ही न्यूनतम और अधिकतम कैद में एक करोड़ रुपए का जुर्माना भी देना होगा और इसके साथ ही आरोपियों से ही परीक्षा की लागत भी वसूली जाएगी। इस कानून से पहले केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा सार्वजनिक एग्जाम के संचालन में शामिल सभी संस्थाओं के पास अनुचित साधनों या किए गए अपराधों से निपटने के लिए कोई कानून नहीं था, जिसके कारण उन्हें यह कानून लाना पड़ा।

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