मछली पकड़ने को लेकर ग्रामीणों का अलग ही उत्साह, जानिए गदिया मताई का नाम कैसे पड़ा

CG News: अंतागढ़: छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ में हर साल कोयलीबेड़ा की जीवनदायी नदी मेढकी नदी में एक अनोखी परम्परा निभाई जाती है।

मछली पकड़ने को लेकर ग्रामीणों का अलग ही उत्साह, जानिए गदिया मताई का नाम कैसे पड़ा

नीयत कुमार श्रीवास की रिपोर्ट।

CG News: अंतागढ़: छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ में हर साल कोयलीबेड़ा की जीवनदायी नदी मेढकी नदी में एक अनोखी परम्परा निभाई जाती है। इस दिन आस पास के हजारों ग्रामीण इकठ्ठा होते हैं और एक साथ नदी में उतर कर मछली पकड़ते हैं। इसको गदिया मताई (मछली पकड़ने का) के नाम से जाना जाता है।

यह है परंपरा

चार पांच साल से एनीकट बनने के कारण जब एनीकट के गेट खोला जाता है तब यह मौका बनता है। इस साल यह मौका आज बना है जब गदिया मताई की रश्म निभाई जा रही है। गदिया मताई को लेकर ग्रामीणों में जगब का उत्साह होता है और दूर दराज से अपने रिश्तेदारों व अतिथियों को बुलाया जाता है।

नदी का होता है पूजन

ऐसे हजारों लोगों को एक साथ नदी में उतर कर मछली पकड़ते देखना किसी मेला से कम नही होता। इस दौरान 18 पँचायत के 68 गांवो के ग्रामीण इकठ्ठा होते हैं।दो गांवो की मौजूदगी में सबसे पहले नदी का पूजन किया जाता है व लाली अर्पण के बाद कामना की जाती है कि किसी को भी नदी के कारण कोई हानि न हो व हमेशा की भांति सभी गांवो को मेढकी नदी से जल सुविधा मिलती रहे। इसके साथ ही शुरू होता है गदिया मताई (मछली पकड़ने) का त्योहार।

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