CG Lok Sabha Chunav: छत्‍तीसगढ़ की चार सीटों पर 5 % कम वोटिंग से बढ़ी बीजेपी-कांग्रेस की टेंशन, इस पार्टी को फायदा

CG Lok Sabha Chunav: छत्‍तीसगढ़ की चार सीटों पर 5 % कम वोटिंग से बढ़ी बीजेपी-कांग्रेस की टेंशन, पिछले रिकॉर्ड से ये रिकॉर्ड अलग

CG Lok Sabha Chunav: छत्‍तीसगढ़ की चार सीटों पर 5 % कम वोटिंग से बढ़ी बीजेपी-कांग्रेस की टेंशन, इस पार्टी को फायदा

   हाइलाइट्स

  • वोट प्रतिशत बढ़ा तो बीजेपी को बढ़त
  • वोट प्रतिशत घटा तो कांग्रेस को बढ़त
  • नक्‍सल प्रभावित क्षेत्रों में कम वोटिंग

CG Lok Sabha Chunav: देश में लोकसभा चुनावों के रिकॉर्ड देखें तो जब भी मतदाता वोटिंग के लिए उमड़े हैं, तब-तब बीजेपी को फायदा हुआ है। जब भी वोटिंग कम हुई है तो मतदाताओं का झुकाब कांग्रेस की ओर रहा है।

हालांकि इस बार छत्‍तीसगढ़ (CG Lok Sabha Chunav) में पहले और दूसरे चरण में हुई वोटिंग में मतदाताओं के मूड को कोई समझ नहीं पाया है। इस बार पिछले लोकसभा चुनाव से कम वोटिंग हुई है।

इस बार 5 प्रतिशत कम वोटिंग होने से बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टी की चिंता बढ़ गई है, क्‍योंकि वोट का प्रतिशत उतना नहीं घटा है कि किसी एक दल के जीतने का कोई भी अनुमान लगा सकें।

   लोकसभा चुनावों में ऐसा था वोटिंग% 

CG Lok Sabha Election Voting %

   पिछले चुनाव से कम हुई वोटिंग

बता दें कि छत्तीसगढ़ में पहले और दूसरे चरण की चार लोकसभा सीट (CG Lok Sabha Chunav) बस्तर, कांकेर, महासमुंद और राजनांदगांव में वोटिंग हो चुकी है।

बस्तर, कांकेर, महासमुंद और राजनांदगांव में साल 2019 की अपेक्षा कम वोटिंग हुई है। आंकड़ों की बात करें तो बस्तर में 3.34, कांकेर में 3.7, महासमुंद में 5.97 और राजनांदगांव में 6.73 प्रतिशत कम मतदान हुआ है।

मतदान दल के शत प्रतिशत वापस आने के बाद आंकड़ा बढ़ने का दावा निर्वाचन आयोग के अधिकारी कर रहे हैं।

   पुराने रिकॉर्ड बीजेपी के पक्ष में

CG Lok Sabha Chunav-bjp

देश में लोकसभा चुनाव (CG Lok Sabha Chunav) की बात करें तो हर बार कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं और राज्य के नेताओं ने पूरा दम लगाया है। जबकि पिछले कुछ रिकॉर्ड में हर बार जब रिजल्‍ट आता है तो बीजेपी के पक्ष में यह रहा है।

इधर छत्‍तीसगढ़ प्रदेश की बात करें तो राज्य के गठन के बाद लोकसभा (CG Lok Sabha Chunav) के चार चुनाव हुए, लेकिन कांग्रेस नेता राष्ट्रीय मुद्दों और स्थानीय मुद्दों को जनता के समक्ष रख नहीं पाए।

वर्ष 2004 में प्रदेश में 52.0 प्रतिशत, 2009 में 55.3 प्रतिशत, 2014 में 69.5 प्रतिशत और 2019 में 73.8 प्रतिशत वोटिंग हुई। इन सभी रिकॉर्ड में हर बार मतदान में वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है।

इसके साथ ही बीजेपी के वोट प्रतिशत में भी बढ़ोतरी हुई है।

   वोट शेयर में बीजेपी आगे रही

पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड की बात करें तो बीजेपी के पास बढ़त रही है। सवाल ये भी है कि पहले चरण में कम वोटिंग होने से बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट शेयर में अंतर अब क्‍या हो सकता है। इसको लेकर भी सवाल है।

छत्‍तीसगढ़ (CG Lok Sabha Chunav) में पहले और दूसरे चरण में कांग्रेस-बीजेपी के प्रत्‍याशियों की जीत-हार का असल खेल वोट शेयर के आंकड़ों में छिपा है।

पिछले रिकॉर्ड के अनुसार 2004 में कांग्रेस और बीजेपी के वोट शेयर में 7.5 प्रतिशत, 2009 में 8 प्रतिशत से ज्यादा, 2014 में 9 प्रतिशत से ज्यादा और 2019 में वोट शेयर में 10 प्रतिशत से ज्यादा का अंतर रहा है। इस अंतर के चलते हर बार बीजेपी की जीत हुई है।

   किस पार्टी की बढ़ेगी चिंता, किसे लाभ

CG Lok Sabha Chunav polls

छत्‍तीसगढ़ में जब भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ता है तो बीजेपी को फायदा मिलता है। छत्‍तीसगढ़ प्रदेश (CG Lok Sabha Chunav) में विधानसभा की बात करें तो यहां ये धारणा है कि विधानसभा में वोटिंग प्रतिशत बढ़ता है तो मौजूदा राज्य सरकार की चिंता बढ़ जाती है।

जबकि लोकसभा चुनाव (CG Lok Sabha Chunav) में वोटिंग प्रतिशत के बढ़ने की बात करें तो इससे बीजेपी को फायदा मिलता है। अब छत्‍तीसगढ़ में पहले और दूसरे चरण में वोटिंग प्रतिशत में पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले कम वोटिंग का कोई खास अंतर नहीं है।

ऐसे में राजनीतिक दल भी टेंशन में है कि इस बार मतदाता किस तरफ झुका है। हालांकि बीजेपी और कांग्रेस अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।

   सत्‍ता पक्ष को होता है नुकसान

छत्‍तीसगढ़ में विधानसभा और लोकसभा चुनावों (CG Lok Sabha Chunav) की बात करें तो जब भी वोट प्रतिशत बढ़ा है, इससे बीजेपी को फायदा हुआ है।

छत्‍तीसगढ़ में वर्ष 2000 के बाद से सभी चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ा है, बीजेपी ने बढ़त हासिल की है। वहीं मौजूदा सरकार पर इसका असर भी होता है। जबकि जब भी वोट प्रतिशत कम हुआ है कांग्रेस ने बढ़त हासिल की है।

हालांकि पहले और दूसरे चरण की चार सीटों (CG Lok Sabha Chunav) पर 5 प्रतिशत वोटिंग कम होना दोनों ही प्रमुख दलों के लिए चिंता का विषय है। दोनों ही दल आंकलन नहीं कर पा रहे हैं कि इन चार लोकसभा सीटों पर मतदाता ने किस पार्टी पर भरोसा जताया है।

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   वोटिंग कम होने के ये कारण भी

CG Lok Sabha Chunav-Down Voting

कांकेर में नक्‍सलियों ने चुनाव का बहिष्‍कार किया था। इससे ग्रामीण डरे हुए थे। नक्‍सलियों ने इसको लेकर बैनर भी लगाए थे। यह बैनर मरबेड़ा मतदान केंद्र से 1 से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर मुख्य सड़क किनारे लगाया गया था।

पखांजूर क्षेत्र के आल्दंड और सीतरम केंद्र में सन्नाटा पसरा रहा। दोनों की केंद्रों में सिर्फ कर्मचारियों ने ही वोट डाले थे। यहां के मतदाता दहशत में थे।

महासमुंद लोकसभा (CG Lok Sabha Chunav) के नक्‍सल प्रभावित ब्रिंद्रावनागढ़ में पोलिंग बूथों पर सन्‍नाटा पसरा रहा। इन केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम होने के बाद भी मतदाता वोट डालने नहीं पहुंचे।

राजनांदगांव लोकसभा सीट में कई बूथों पर ईवीएम मशीनों में खराबी आ गई। इसके चलते वोटिंग में देरी हुई है। इसके कारण लोग मतदान केंद्रों पर तो पहुंचे, लेकिन लोग ज्‍यादा देर होने के कारण वापस लौट गए।

दोपहर के समय में तेज धूप के कारण मतदाताओं को पोलिंग बूथों पर धूप में खड़ा रहने में परेशानी हो रही थी। इस दौरान कुछ केंद्रों पर मतदाताओं की तबीयत भी खराब हो गई थी।

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