90 दिन की कड़ी ट्रेनिंग के बाद बनता है एक NSG कमांडो, चयन प्रक्रिया में 80% जवान हो जाते हैं फेल

90 दिन की कड़ी ट्रेनिंग के बाद बनता है एक NSG कमांडो, चयन प्रक्रिया में 80% जवान हो जाते हैं फेलAn NSG commando is formed after 90 days of rigorous training, 80% of the jawans fail in the selection process nkp

90 दिन की कड़ी ट्रेनिंग के बाद बनता है एक NSG कमांडो, चयन प्रक्रिया में 80% जवान हो जाते हैं फेल

नई दिल्ली। भारत में आपने अक्सर VIP लोगों की सुरक्षा में ब्लैक कैट कमांडोज को लगे देखा होगा। ये कमांडोज राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी NSG के सदस्य होते हैं। ये कमांडोज चंद सेकंड में दुश्मन को धाराशायी कर देते हैं। इनको बारे में कहा जाता है कि ये शारीरिक और मानसिक रूप से इतने मजबूत होते हैं कि 1 कमांडो 10 लोगों पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में आज हम आपको इनके ट्रेनिंग और NSG फोर्स में शामिल होने लिए इन्हें क्या-क्या करना पड़ता है। साथ ही ये भी बताएं कि उनकी सैलरी कितनी होती है।

गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है NSG

दरअसल, ब्लैक कैट कमांडोज यानी NSG भारतीय सेनाओं की अलग-अलग बटालियन से चुने जाते हैं। NSG भारतीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है। जो देश की एक स्पेशल आतंकवाद विरोधी इकाई है। NSG का गठन साल 1984 में किया गया था। देश के वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा का जिम्मा राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के पास ही होता है।

कैसे होता है इनका चयन?

NSG में भर्ती की अगर बात करें, तो दूसरे फोर्स की तुलना में इसमें कोई सीधी भर्ती की प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए चुनिंदा जवानों का चयन आर्मी और अर्धसैनिक बलों से किया जाता है। NSG में 53% जवानों का चयन इंडियन आर्मी से हेता है। जबकि शेष 47% जवानों का चयन अर्धसैनिक बलों से किया जाता है। जैसे - CRPF,ITBP,RAF,BSF,SSB

NSG में चयन की प्रक्रिया भारतीय सेना की सामान्य चयन प्रक्रिया से एकदम अलग होती है। इसमें चयन के लिए विभिन्न फोर्स से चुने हुए जवानों को सबसे पहले एक कठिन परीक्षा से गुजरना होता है। इसके लिए इन्हें 1 हफ्ते की कठोर परीक्षा देने होती है। ये परीक्षा इतनी कठिन होती है कि इसमें 80 फीसदी जवान शुरूआती दौर में ही फेल हो जाते हैं। केवल 20 फीसदी जवान ही अगले चरण में पहुंच पाते हैं। अंतिम राउंड में तो ये संख्या केवल 15 फीसदी ही रह जाती है।

चयन के बाद शुरू होता है सबसे कठिन सफ़र

अंतिम चयन के बाद शुरू होता है, सबसे कठिन दौर। ये पूरे 3 महीने यानी 90 दिनों की ट्रेनिंग होती है। इस दौरान जवानों को फ़िज़िकल और मेंटल ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग दौरान शुरुआत एक कमांडो बनाने के लिए इन जवानों की योग्यता केवल 40 फ़ीसदी तक ही होती है, लेकिन अंत आते-आते ये 90 फ़ीसदी तक पहुंच जाते हैं। इस दौरान इन्हें 'बैटल असॉल्ट ऑब्सक्टल कोर्स' और 'सीटीसीसी काउंटर टेररिस्ट कंडिशनिंग कोर्स' की भी ट्रेनिंग दी जाती है। जबकि सबसे अंत में साइकॉलोजिकल टेस्ट होता है।

कितनी होती है इनकी सैलरी?

NSG कमांडो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी काम करने के लिए जाने जाते हैं। देश में जब भी कोई आतंकी हमला या फिर कोई बड़ी घटना घटती है NSG कमांडो इस दौरान सबसे आगे होते हैं। मुंबई में हुए 26/11 आंतकी हमले के दौरान भी इन्हीं कमांडोज़ ने आख़िर तक मोर्चा संभाला था। ऐसे में इन कमांडो की सैलरी भी काफी अच्छी होती है। इनकी सैलरी 84 हजार रूपये से लेकर 2.5 लाख रूपये तक होती है। इनकी औसत सैलरी करीब 1.5 लाख रूपये प्रति महीने होती है। इसके अलावा इन्हें कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं।

NSG को तीन कैटेगरी में बांटा गया है

कई लोग सोचते होंगे कि NSG कमांडोज एक ही तरह के होते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। NSG में 3 तरह की कैटेगरी होती हैं। Special Action Group (SAG), Special Ranger Group (SRG) और Special Composite Group (SCG)

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