Amroha kand: आजाद भारत में किसी महिला को पहली बार होगी फांसी, जानिए सजा पाने वाली शबनम की कहानी

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Image source- @srinihyd999

नई दिल्ली। आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी दी जाएगी। इस महिला का नाम है शबनम (Shabnam)। दोषी महिला के साथ उसके प्रेमी को भी फांसी दी जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश के मथुरा जेल (Mathura Jail) में तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। महिला अभी रामपुर जेल में बंद है। जबकि, उसका प्रेमी आगरा जेल में। फांसी देने के लिए जेल प्रशासन डेथ वारंट जारी होने का इंतजार कर रहा है। तो आइए जानते हैं कि शबनम ने ऐसा क्या किया था कि उसे फांसी की सजा दी गई है।

परिवार के 7 लोगों की बेरहमी से कर दी थी हत्या
दरअसल, आज से 13 साल पहले अमरोहा की रहने वाली शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। अमरोहा जिले के गांव बावनखेड़ी में रहने वाली शबनम काफी पढ़ी लिखी है। उसने अंग्रेजी और भूगोल में डबल एमए किया है। उसके पिता भी शिक्षक थे और वह घर की इकलौती बेटी है। उसके परिवार के पास काफी जमीन जायदाद थे। यानी कुल मिलाकर कहें तो वह एक शिक्षित और रईस परिवार से ताल्लुक रखती थी। लेकिन उसने अपने लिए जो प्रेमी सलीम को चुना था वो पांचवीं फेल और पेशे से एक मजदूर था। इस वजह से दोनों के संबंधों को लेकर परिजन हमेशा विरोध किया करते थे।

अपने प्रेमी के साथ मिलकर घटना को दिया अंजाम
बस इसी बात से नाराज होकर बाबनखेड़ी निवासी शबनम ने 14 अप्रैल 2008 की रात में अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता शौकत अली, मां हाशमी, भाई अनीस अहमद, उसकी पत्नी अंजुम, भतीजी राबिया और भाई राशिद के अलावा अनीस के 10 महीने के बेटे अर्श की हत्या कर दी थी। हत्या करने से पहले, दोनों ने मिलकर सभी घरवालों को पहले दवा देकर बेहोश किया और फिर भतीजे अर्श को छोड़कर सभी को कुल्हाड़ी से काट कर मार डाला। जबकि अर्श का गला दबाया गया था।

शबनम ने पुलिस को चकमा देने की कोशिश की
शबनम ने हत्या करने के बाद पुलिस को चकमा देने के लिए तेजी से रोना और चीखना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर जब आसपास के लोग वहां पहुंचे तो मंजर को देखकर दंग रह गए। पूरा घर खून से लाल था। वहां सात लाशें पडीं थीं। घर में सिर्फ एक अकेले लड़की शबनम बची थी। आधी रात को हुए इस वारदात की सूचना जैसे ही पुलिस को मिली पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची और शबनम से पुछताछ की तो उसने बताया कि घर में कुछ लुटेरे घुस गए थे और उन्होंने ही पूरे परिवार की हत्या कर दी। वह बाथरूम में थी इस कारण से बच गई।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा
शबनम की बात मानते हुए पुलिस ने इस घटना की जांच पहले लूट के एंगल से की, लेकिन उन्हें कोई सबूत नहीं मिला। तब तक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी आ चुकी थी। इस रिपोर्ट ने पुलिस को चौका दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि मृतकों को मारने से पहले नशीली दवा देकर बेहोश किया गया था। इस रिपोर्ट से शक की सुई सीधे शबनम की तरफ घूम गई। पुलिस ने उसके कॉल डिटेल निकाले, जिससे पता चला कि वो हत्या की रात एक नंबर पर कई बार बात की थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसका मेडिकल टेस्ट करवाया। टेस्ट में उसके गर्भवती होने का पता चला। ऐसे में पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ करनी शुरू कर दी। आखिरकार शबनम टूट गई और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

 

जेल में ही दिया बेटे को जन्म
इसके बाद, पुलिस ने सलीम को भी गिरफ्तार कर लिया और फिर उसके निशानदेही पर कत्ल में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी को भी बरामद कर लिया। वहीं शबनम ने जेल में रहते हुए ही 14 दिसंबर 2008 को बेटे को जन्म दिया। पहले तो उसका बेटा जेल में ही उसके साथ रहता था। लेकिन 15 जुलाई 2015 को उसने अपने बेटे को जेल से बाहर अपने एक मित्र के पास भेज दिया। शबनम ने अपने फ्रेंड को बेटा सौंपने से पहले दो शर्तें रखी। एक ये कि कभी भी उसके बेटे को उस गांव में नहीं ले जाया जाएगा जहां घटना हुई थी और दूसरा ये कि उसका नाम अब बदल दिया जाएगा।

2010 में ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
शबनम और उसके प्रेमी सलीम को साल 2010 में ट्रायल कोर्ट ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा। पहले राज्यपाल और फिर 15 फरवरी को राष्ट्रपति ने भी उसकी दया याचिका को खारिज कर दिया। ऐसे में अब उसका फांसी पर लटकना तय है।

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