Amla Navami 2022 : आंवला नवमी आज, करना न भूलें आंवला के ये उपाय, जानें मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व

Amla Navami 2022 : आंवला नवमी आज, करना न भूलें आंवला के ये उपाय, जानें मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व

नई दिल्ली। अक्षय तृतीया की तरह की अक्षय Amla Navami 2022: फल देने वाला त्योहार यानि आंवली नवमी का त्योहार आज यानि 2 नवंबर को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन आंवले की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन से आंवले का सेवन भी शुरू किया जाता है। इसी के साथ इस दिन आंवला के कुछ खास उपाय भी बताए गए हैं जिसे करने से आपको धार्मिक लाभ हो सकता है। तो चलिए जानते हैं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज आंवला नवमीं पर कौन से उपाय आपको करने से लाभ होगा।

क्यों कहते हैं आंवला नवमीं —
ज्योतिषाचार्य पंडित राम गोविंद शास्त्री के अनुसार Amla Navami 2022 Date: कार्तिक शुक्ल नवमीं को अक्षय या आंवला नवमी कहलाती है। इस दिन स्नान, पूजन, तर्पण तथा अन्न आदि के दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

द्वापर युग की हुई थी शुरूआत —
आपको बता दें Amla Navami 2022: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी या अक्षय नवमी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन से ही द्वापर युग की शुरुआत हुई थी। इतना ही नहीं ऐसा भी माना जाता है इस दिन किया गया दान-धर्म का फल आपको अगले जन्म तक फल दिलाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान करने से उसका पुण्य वर्तमान के साथ अगले जन्म में भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, आंवला नवमीं के दिन आंवला के वृक्ष की पूजा की जाती है। कहते हैं कि ऐसा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

आंवला नवमी 2022 शुभ मुहूर्त-
आपको बता दें नवमीं तिथि 1 नवंबर मंगलवार यानि कल रात 11:04 मिनट से शुरू हो चुकी है जो आज 2 नवंबर यानि बुधवार को रात 09:09 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। आंवला नवमीं का शुभ मुहूर्त सुबह 06:34 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12:04 मिनट तक रहेगा।

आंवला नवमी महत्व-
आंवला नवमी पर आंवला के वृक्ष की पूजा तो की ही जाती है साथ ही इस दिन इस वृक्ष के नीचे भोजन बनाने और करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन की महत्व और अधिक इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि कहते हैं इस दिन भगवान विष्णु ने कुष्माण्डक दैत्य को भी मारा था। साथ ही इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध से पहले तीन वन की परिक्रमा की थी। यही कारण है कि इस दिन लोग आज भी अक्षय नवमी पर मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा करते हैं।

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