Chhattisgarh News: पांच सूत्री मांगों को लेकर नर्सिंग स्टाफ़ और डॉक्टरों ने किया धरना प्रदर्शन

नर्सिंग स्टाफ ने वेतन विसंगति सहित काम के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया।

Chhattisgarh News: पांच सूत्री मांगों को लेकर नर्सिंग स्टाफ़ और डॉक्टरों ने किया धरना प्रदर्शन

अंबिकापुर। प्रदेश सरकार के खिलाफ नर्सिंग स्टाफ ने वेतन विसंगति सहित काम के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। आज छत्तीसगढ़ हेल्थ फेडरेशन के बैनर तले मेडिकल कॉलेज अस्पताल के 12 संघटन सामूहिक हड़ताल पर है। वहीं 2018 से वेतन विसंगति को लेकर नर्सिंग स्टाफ संघर्ष कर रहे है।

इन मांगों को लेकर हो रही हड़ताल

आपको बता दे की सरगुजा जिले में 300 से अधिक स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग स्टाफ कार्यरत हैं। इधर पांच सूत्रीय मांगें जिनमें वेतन विसंगति, कोविड में काम करने वाली नर्सों को कोविड इंसेंटिव की मांग, पुलिस विभाग के समान वेतन देने सहित डॉक्टरों की सुरक्षा से संबंधित की मांग छत्तीसगढ़ के हेल्थ फेडरेशन के बैनर तले एक दिवसीय हड़ताल के आयोजन में की गई।

वहीं हड़ताल के माध्यम से सरकार तक इनकी मांगों पर ध्यान आकर्षण करने की बात कही। नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि अगर हमारी मांगे पूरी नहीं की गई तो 21 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे।

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग को लेकर आज अंबिकापुर जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ता संघ ने एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ता संघ जिला अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने बताया कि पूरे प्रदेश में जिला अधिवक्ता संघ के द्वारा आज एक दिवसीय सांस्कृतिक धरना प्रदर्शन कर रहा है।

भाजपा सरकार से भी की थी मांग

अधिवक्ताओं ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग की उन्होंने बताया कि पूर्व में रही भाजपा सरकार से ये मांग की गई थी। जो पूरी नहीं हुई अब कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। लेकिन अब तक उनकी मांग अधूरी है। जिससे अधिवक्ताओं को अपने पेशे में दिक्कतों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं का काम बढ़ गया है।

पुलिस और अधिकारियों पर भरोसा

अधिवक्ता जनता का प्रतिनिधित्व करते है। अंबिकापुर में भी कई मामले हो चुके है जिनमें अधिवक्ताओं को अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पुलिस और अधिकारियों का भरोसा ही का सामना भी उन्हें करना पड़ता है। इसलिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू होना जरूरी है।

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