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wedding मौजूदा दौर में देखा जा रहा है, कि लोग अपनी जाति, अपने धर्म और अपनी परम्पराओं के अनुरूप अपना विवाह रचाते हैं। लेकिन बैतूल में अपनी स्वतंत्रता और अपने मौलिक अधिकार का उपयोग कर एक दम्पत्ति ने विवाह रचाकर अपने जीवन की शुरुवात की। पेशे से अधिवक्ता दर्शन बुंदेले और उनकी पत्नी राजश्री ने संविधान की शपथ लेकर और संविधान की प्रस्तावना पढ़ कर अपने नव जीवन की शरुवात की।
दर्शन का मानना है कि, बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान में संविधान हमे स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। देश मे आज जाती धर्म के आधार पर अराजकता का माहौल देखा जा रहा है। इस सबसे अलग हटकर हमने ये तय किया था कि, हम अपना विवाह संविधान की शपथ लेकर रचाएंगे। और समाजको ये संदेश देने का प्रयास करेंगे किस देश मे रहने वाला प्रत्येक नागरिक एक है। और पूर्ण स्वतंत्र है। दर्शन के इस कदम की सराहना करते हुए साथी अधिवक्ताओं में हर्ष की लहर है उनका कहना है कि जातिगत भावनाओं से अलग हटकर किया गया ये विवाह समाज के प्रत्येक तबके के लिए अपने आप मे एक संदेश और मिसाल है।
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