Ajab Gajab News: रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिए निकाली जिंदा आदमी की अर्थी, फसलें सूखने का मंडरा रहा खतरा

धार। प्रदेश में बीते दिनों से मॉनसून रूठा हुआ है। जुलाई के महीने में प्रदेश में छुटपुट बारिश (mausam ki khabar) ही देखने को मिल रही है। अब जुलाई का आधे से भी ज्यादा महीना बीत चुका है। इस महीने बारिश न होने के कारण किसानों की फसलें अब सूखने की कगार पर आ गईं हैं। ऐसे में किसानों की चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं। वहीं लोग रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिए टोने-टोटकों का सहारा ले रही है। इसी तरह प्रदेश के धार जिले में भी लोग बारिश के लिए इंद्र देव (MP Weather Update) को मनाने की जुगत में जुटे हैं। यहां के लोगों ने जिंदा युवक की शवयात्रा तक निकाल डाली। धार जिले के बदनावर के ग्राम सिलोदा बुजुर्ग में किसानों को लंबे समय से बारिश की आस है।

जुलाई का आधा महीना बीत जाने के बाद भी धरती सूखी पड़ी है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं। किसानों का कहना है कि अगर 2-3 दिन और बारिश नहीं हुई तो उनकी फसल खराब हो जाएगी। इसी डर के कारण यहां के ग्रामीणों ने इंद्रदेव को खुश करने के लिए जिंदा व्यक्ति की अर्थी निकाल डाली। इतना ही नहीं यहां के एक पटेल का मुंह काला करके गधे पर उल्टा बिठाकर शवयात्रा के साथ घुमाया गया। इस शवयात्रा में लोग पीछे-पीछे चलते रहे।

टोटकों से होती है अच्छी बारिश
यहां के लोगों का मानना है कि इस तरह के टोटकों से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और तेज बारिश होती है। इस शवयात्रा के पीछे बड़ी संख्या में लोग चलते रहे और ढोल नगाड़े बजाकर यह यात्रा निकाली। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि जब भी यहां ढंग से बारिश नहीं होती तो इसी तरह का टोटका किया जाता है। इससे पहले के सालों में भी यह टोटके किए जाते रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के टोटकों से अच्छी बारिश होती है।

बता दें कि प्रदेश में पिछले दिनों से लगातार तेज धूप और उमस देखने को मिल रही है। प्रदेश में किसान बारिश की आस में इंतजार कर रहे हैं। सूरज देवता के तेज प्रकोप से फसलें सूखने की कगार पर आ गई हैं। जुलाई के महीने में प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बूंदा-बांदी देखने को जरूर मिली है। हालांकि मौसम विभाग (IMD Warning) के अनुसार प्रदेश में 20 जुलाई के बाद से तेज बारिश के आसार जताए जा रहे हैं। मॉनसून ब्रेक खत्म होने के बाद भी प्रदेश में बारिश (Rain in MP) थम गई है। मॉनसून के पहले जून के महीने में काफी बारिश देखने को मिली थी। इसके बाद से ही बारिश की वाट किसान जोह रहे हैं।

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