Breaking News: उप्र के बाद मप्र में भी उठी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग, सीएम को लिखा पत्र

Breaking News: उप्र के बाद मप्र में भी उठी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग, सीएम को लिखा पत्र

भोपाल। पूरे देश में इस समय जनसंख्या नियंत्रण कानून की चर्चाएं तेज हैं। उप्र के सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधनसाभा चुनावों से ठीक पहले जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कानून पास किया है। अब इसकी मांग मप्र में उठना शुरू हो गई है। इसको लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने सीएम शिवराज सिंह को पत्र लिखा है। इस पत्र में मप्र में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग उठाई है। शर्मा ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून पूरे देश में लागू किया जाना जरूरी है। शर्मा ने कहा कि मप्र की सुरक्ष के लिए भी यह जरूरी है कि दो ही बच्चे हों। शर्मा ने कहा कि 5 बीबी, 25 बच्चे पैदा कर सड़क पर छोड़ने के लिए नहीं हैं। लोगों को इसको लेकर मजहबी चश्मा उतारकर देखना चाहिए। रामेश्वर शर्मा ने अपने पत्र में कहा कि मप्र सीएम शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रगति कर रहा है। मप्र देश के टॉप राज्यों में जगह बनाए हुए है। वहीं जनसंख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी के कारण काफी परेशानी देखने को मिलती है।

इसीलिए प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कानून बनना चाहिए। बढ़ती जनसंख्या प्रदेश के विकास और सुशासन में एक बड़ी वाधा बनती जा रही है। शर्मा ने कहा कि मप्र की आबादी दुनिया के चार बड़े देशों से भी ज्यादा है। इन देशों में जर्मनी, फ्रांस, इटली और इंग्लैंड शामिल है। शर्मा ने कहा कि इन देशों में मप्र के मुकाबले आधी जनसंख्या है। बता दें प्रदेश की जनसंख्या 2011 में हुई जनगणना के आधार पर 7 करोड़ 25 लाख थी। वहीं 2021 में अनुमानित जनसंख्या की बात करें तो 8 करोड़ 75 लाख बताई जा रही है। पिछले 10 सालों में करीब सवा करोड़ जनसंख्या मप्र में बढ़ी है। इसी को देखते हुए रामेश्वर शर्मा ने मप्र में कानून बनाने के लिए सीएम शिवराज सिंह को एक पत्र लिखा है।

उप्र सीएम योगी ने बनाया कानून
उप्र में हाल ही में जनसंख्या नियंत्रण कानून को जमीन पर उतारा गया है। इस नियम के तहत एक परिवार में दो ही बच्चों की अनुमति होगी। यह कानून जल्द ही पारित हो सकता है। इस कानून के तहत उप्र में दो बच्चों से अधिक परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा। साथ ही सरकारी सब्सिडीज से भी वंचित रखा जाएगा। वहीं स्थानीय चुनावों में भी भाग नहीं ले पाएंगे। सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन रोकने और फिर बर्खास्त करने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि अभी तक तीसरी बच्चे को गोद लेने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

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