Black Fungus: कोरोना के बाद गहरा रहा ब्लैक फंगस का खतरा, दो दिन में वॉर्ड के आधे बेड फुल...

Black Fungus: कोरोना के बाद गहरा रहा ब्लैक फंगस का खतरा, दो दिन में वॉर्ड के आधे बेड फुल…

भोपाल। प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर ने जमकर तबाही मचाई है। इसके बाद अब ब्लैक फंगस का खतरा भी मंडराने लगा है। पिछले दिनों से लगातार इसके मरीज सामने आ रहे हैं। राजधानी के हमीदिया अस्पताल में इसके लिए अलग से वॉर्ड बनाया गया था। अब यह वॉर्ड मरीजों से भरता जा रहा है। इस वॉर्ड के आधे बेड फुल हो चुके हैं। कई लोगों का कोरोना और ब्लैक फंगस का इलाज एक साथ चल रहा है। राजधानी में अब तक 70 से ज्यादा मरीज ब्लैक फंगस का शिकार हो चुके हैं।

बीते 15 दिनों में तेजी से ब्लैक फंगस के मरीज तेजी से बढ़े हैं। वहीं हमीदिया अस्पताल में पिछले दो दिनों में ही आधे बेड फुल हो चुके हैं। शहर के अलग-अलग अस्पतालों की बात करें तो कुल 70 मरीजों को भर्ती किया गया है। यह सभी मरीज ब्लैक फंगस का शिकार हैं। इन मरीजों का इलाज चल रहा है। ब्लैक फंगस के दंश से जूझ रहे मरीजों में सबसे ज्यादा 23 मरीज हमीदिया अस्पताल में भर्ती है। यहां बीते दो दिनों में कुल 30 बेड में से 15 से ज्यादा बेड फुल हो गए हैं। बता दें कि प्रदेश में कोरोना के साथ ब्लैक फंगस के मरीज भी सामने आ रहे हैं। रोजाना हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। वहीं ब्लैक फंगस की चपेट में आने की खबरें भी प्रदेश के अन्य स्थानों से भी आ रही हैं।

क्या है ब्लैक फंगस ?
ब्लैक फंगस एक फंगल डिजीज है। जो म्यूकॉरमाइटिसीस नाम के फंगाइल से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों जो बॉडी की इम्युनिटी को कम करती हों। ब्लैक फंगस शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। लेकिन ज्यादातर मामले आंखों में देखे जा रहे हैं।

शरीर में कैसे पहुंचता है ?
ब्लैक फंगस ज्यादातर मामलों में सांस के जरिए वातावरण से हमारे शरीर में पहुंचता है। अगर आपके शरीर में कही घाव है तो यह सबसे पहले वहां हमला करता है और इंफेक्शन को पूरे शरीर में भी फैला सकता है। ज्यादातर मामलों में इससे आंखो की रोशनी चली जा रही है। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ आंखों पर ही हमला करता है। यह आपके शरीर के किसी भी हिस्से में फैल सकता है और शरीर के उस हिस्से को सड़ा सकता है। हालांकि अच्छी बात ये है कि यह एक रेयर इंफेक्शन है। इस कारण से ज्यादातर लोग इसके चपेट में नहीं आते। ये फंगस वातावरण में कही भी हो सकता है। खासतौर पर इसे जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में पनपते हुए देखा गया है। सड़ी हुई लकड़ियों और कम्पोस्ट खाद में ये सबसे ज्यादा पाया जाता है।

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