AdityaL1 Launch: भारत के पहले सोलर मिशन आदित्य L1 की सफल लॉन्चिंग, 4 महीने में पहुंचेगा लैगरेंज पॉइंट

देश के पहले सूर्य मिशन के तहत ‘आदित्य एल1’ यान की आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से आज सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर PSLV-C57 के XL वर्जन रॉकेट के जरिए लॉन्चिंग की गई है।

AdityaL1 Launch: भारत के पहले सोलर मिशन आदित्य L1 की सफल लॉन्चिंग, 4 महीने में पहुंचेगा लैगरेंज पॉइंट

श्रीहरिकोटा। AdityaL1 Launch भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) देश के पहले सूर्य मिशन के तहत ‘आदित्य एल1’ यान की आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से आज सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर PSLV-C57 के XL वर्जन रॉकेट के जरिए लॉन्चिंग की गई है।

चार स्टेज वाला है रॉकेट

आपको बताते चलें, PSLV चार स्टेज वाला रॉकेट है, जहां पर आदित्य L1 को रॉकेट 235 x 19500 Km की ऑर्बिट में छोड़ेगा। इसमें 63 मिनट 19 सेकेंड का समय लगेगा। ये स्पेसक्राफ्ट करीब 4 महीने बाद लैगरेंज पॉइंट-1 (L1) तक पहुंचेगा।

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कहा जा रहा है कि, आदित्य के सूरज पर इस पॉइंट पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता, जिसके चलते यहां से सूरज की स्टडी आसानी से की जा सकती है। ​इस मिशन की अनुमानित लागत 378 करोड़ रुपए है।

सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला यान

‘आदित्य एल1’ को सूर्य परिमंडल के दूरस्थ अवलोकन और पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर ‘एल1’ (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु) पर सौर हवा का वास्तविक अवलोकन करने के लिए डिजाइन किया गया है। ‘आदित्य एल1’ सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष यान होगा।

इसे शनिवार पूर्वाह्न 11 बजकर 50 मिनट पर इसरो के भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) के जरिये श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया जाएगा।‘आदित्य एल1’ के 125 दिनों में लगभग 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर लैग्रेंजियन बिंदु ‘एल1’ के आसपास हेलो कक्षा में स्थापित होने की उम्मीद है, जिसे सूर्य के सबसे करीब माना जाता है।

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जानिए क्या है मिशन का उद्देश्य

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सौर वातावरण में गतिशीलता, सूर्य के परिमंडल की गर्मी, सूर्य की सतह पर सौर भूकंप या कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई), सूर्य के धधकने संबंधी गतिविधियों और उनकी विशेषताओं तथा पृथ्वी के करीब अंतरिक्ष में मौसम संबंधी समस्याओं को समझना है।

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‘आदित्य एल1’ सात पेलोड ले जाएगा, जिनमें से चार सूर्य के प्रकाश का निरीक्षण करेंगे। इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘चंद्रयान-3’ की सॉफ्ट लैंडिंग में मिली कामयाबी के बाद इस मिशन को अंजाम दे रहा है।

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