आज का मुद्दा : दिग्गी-नाथ जरूरी या मजबूरी! क्या दिग्गी-नाथ के बिना अधूरी है कांग्रेस की रणनीति?

आज का मुद्दा : दिग्गी-नाथ जरूरी या मजबूरी! क्या दिग्गी-नाथ के बिना अधूरी है कांग्रेस की रणनीति?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ..दो नाम जो प्रदेश की राजनीति के हर समीकरण को प्रभावित करते हैं..एक..संगठन और रणनीति के माहिर..दूसरे..संसाधन और प्रबंधन के धुरंधर..दिग्विजय सिंह का जमीनी नेटवर्क आज भी पार्टी की रगों में दौड़ता है..तो कमलनाथ की पहचान अब भी प्रशासनिक अनुभव और संसाधन जुटाने वाले बड़े नेता के रूप में होती है..कांग्रेस की हर बड़ी बैठक, हर आंदोलन में इन दोनों नेताओं की छाया दिखती है..चाहे विधानसभा में विपक्ष की नीति तय करनी हो या दिल्ली दरबार तक प्रदेश की बात पहुचानी हो..दिग्गी और नाथ, दोनों अब भी पार्टी की पहली पसंद बने हुए हैं..दिग्गी और नाथ की सक्रियता से युवा नेतृत्व पर भी सवाल उठता है..क्या वो मुद्दों को धार देकर उस अंजाम तक नहीं पहुंचा पा रहे..जितनी तीखी आवाज में दिग्विजय या कमलनाथ उठाते हैं..कांग्रेस इसे वरिष्ठों की सक्रियता के रूप में देखती है तो बीजेपी पार्टी के युवा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए गुटबाजी से जोड़ रही है.

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