हाइलाइट्स
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हाई कोर्ट ने 13 साल बाद बढ़ाया मुआवजा
- ₹25 लाख प्रति हेक्टेयर देने का दिया आदेश
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रायपुर एयरपोर्ट विस्तार मामले में किसानों को बड़ी राहत
Raipur Airport Land Compensation: छत्तीसगढ़ के किसानों (Farmers of Chhattisgarh) के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। नया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार (Raipur Airport Expansion) के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा अब बढ़ाकर ₹25 लाख प्रति हेक्टेयर (Land Compensation) कर दिया गया है। हाई कोर्ट (High Court Order) ने किसानों की याचिका पर 13 साल बाद यह बड़ा फैसला सुनाया।
अब मिलेगा 25 लाख का मुआवजा
वर्ष 2011 में सरकार ने रायपुर एयरपोर्ट विस्तार (Airport Expansion Land Acquisition) के लिए बरौद और आसपास के गांवों से करीब 95 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की थी। उस समय किसानों को 17 लाख/हेक्टेयर (Unirrigated Land) और 18.25 लाख/हेक्टेयर (Irrigated Land) के हिसाब से भुगतान किया गया था। लेकिन किसानों ने इसे बेहद कम बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट ने कहा- किसानों के साथ भेदभाव नहीं चलेगा
किसानों ने कोर्ट में दलील दी कि एनआरडीए (NRDA) ने अधिग्रहण से ठीक पहले उसी गांव में जमीन 35 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से खरीदी थी। ऐसे में उन्हें 17 लाख में मुआवजा देना सरासर अन्याय है। हाई कोर्ट ने किसानों की बात मानते हुए कहा कि एक ही क्षेत्र की जमीन के लिए दो अलग-अलग दरें तय करना अनुचित है।
ब्याज और अतिरिक्त लाभ भी मिलेंगे
हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसानों को न केवल ₹25 लाख प्रति हेक्टेयर (25 Lakh per Hectare Compensation) की दर से मुआवजा दिया जाए, बल्कि इसके साथ ही 12% वार्षिक अतिरिक्त राशि, 30% क्षतिपूर्ति (30% Solatium) और कब्जा लेने की तारीख से ब्याज भी दिया जाए। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि यह भुगतान 6 माह के भीतर किया जाए।
इस फैसले के बाद प्रभावित गांवों में खुशी का माहौल है। किसान संगठनों (Farmers Organisations) का कहना है कि यह फैसला किसानों के अधिकार (Farmers Rights) और न्याय की बड़ी जीत है। लंबे संघर्ष के बाद किसानों को आखिरकार सही मुआवजा मिला।
सरकार का पक्ष- गाइडलाइन दर के अनुसार तय हुआ था मुआवजा
वहीं, राज्य सरकार और एनआरडीए ने कहा कि उस समय जमीन का मूल्यांकन गाइडलाइन वैल्यू (Guideline Value of Land) के अनुसार हुआ था। बिक्री पर रोक के कारण औसत बाजार मूल्य उपलब्ध नहीं था, इसलिए उप पंजीयक द्वारा तय दर के आधार पर ही भुगतान किया गया। लेकिन हाई कोर्ट ने किसानों की अपील मानते हुए दरों में संशोधन कर दिया।