Madhya Pradesh High Court Vs MP MLA: शहडोल में ग्राम पंचायत सचिवों के ट्रांसफर में सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों के शिफारिशों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गहरी नाराजगी व्यक्त की। यह याचिका तबादलों से संबंधित एक प्रशासनिक नोटशीट के वायरल होने के बाद दायर की गई थी। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा है कि जब एमपी, एमएल समेत अन्य नेता ही ट्रांसफर करवा रहे हैं तो उन्हें ही प्रशासन और कोर्ट में बैठा देना चाहिए।
नियम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी जरूरी
यह मामला 13 जून 2025 को जिला पंचायत सीईओ द्वारा 81 पंचायत सचिवों के तबादलों से जुड़ा है। बाद में वायरल हुई नोटशीट से यह सामने आया कि इन तबादलों में स्थानीय सांसदों, विधायकों, उपमुख्यमंत्री, और पार्टी के नगर तथा जिला अध्यक्षों की सिफारिशें भी शामिल थीं। जबकि, ट्रांसफर नीति 2025 के अनुसार, इन तबादलों के लिए केवल प्रभारी मंत्री की मंजूरी जरूरत है।
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