Vastu Tips Wall Crack Meaning: वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा का अपना एक अलग महत्व माना गया है। यदि घर की दीवारों में दरारें आने लगती हैं, तो इसे केवल निर्माण की कमजोरी ही नहीं बल्कि वास्तु दोष भी माना जाता है। वास्तु के अनुसार, दीवारों में दरारें घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का कारण बनती हैं, जिससे परिवार के सदस्यों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर उत्तर दिशा की दीवार में दरार आने को मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की कृपा में बाधा के रूप में देखा जाता है। ऐसे में घर में सुख-समृद्धि रुक सकती है। आइए जानते हैं किस दिशा में दरार आने का क्या असर होता है
वास्तु के अनुसार घर की अलग-अलग दिशाओं में दरार का प्रभाव
पूर्व दिशा की दरार : पूर्व दिशा में दरार आने से सामाजिक मान-प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है। व्यक्ति की छवि और सम्मान को नुकसान पहुंचने का संकेत मिलता है।
उत्तर दिशा की दरार : इस दिशा में दरार आने पर व्यापार में घाटा और आर्थिक नुकसान की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
पश्चिम दिशा की दरार : पश्चिम दिशा में दरार आने से धन का संचय मुश्किल हो जाता है और जोड़ा हुआ पैसा भी खर्च होने लगता है।
दक्षिण दिशा की दरार : दक्षिण दिशा में दरार आने से मानसिक शांति भंग होती है और कार्यक्षेत्र में बाधाएं आने लगती हैं।
दक्षिण-पश्चिम दिशा की दरार : यह दिशा रिश्तों के लिए अहम मानी जाती है। यहां दरार आने से परिवार के सदस्यों में आपसी कलह और अनबन बढ़ सकती है।
उत्तर-पूर्व दिशा की दरार : इस दिशा में दरार आने से मानसिक तनाव और चिंता बढ़ सकती है, जिससे घर का माहौल प्रभावित होता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दीवारों में दरारें न केवल सौंदर्य बिगाड़ती हैं बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी बनती हैं। इसलिए इनका तुरंत निवारण करना जरूरी है ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे और सुख-समृद्धि बनी रहे।
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