Madhya Pradesh Bhopal Private School Association Protest Update: भोपाल में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को लोक शिक्षण संचालनालय कार्यालय परिसर में अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने जिम्मेदार अधिकारियों की न्यायिक जांच के साथ प्रदेशभर के 250 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता बहाल करने की मांग की। डीपीआई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सांकेतिक रूप से अर्थी की झांकी निकाली और उसे जलाकर सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया। डीपीआई के अधिकारी को मांग पत्र सौंपा।
लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में लगभग 250 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता सत्र के बीच में ही रद्द कर दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग ने नियमों में कई विसंगतियाँ बरती हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। एसोसिएशन ने मान्यता बहाली और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग की है।
दो दिन में नवीनीकरण, वरना आंदोलन
स्कूल संचालकों का आरोप हैं कि जिन स्कूलों की मान्यता खत्म की है, वह पिछले 25 से 30 से संचालित हैं। लोक शिक्षण संचालनालय ने दो दिन में नवीनीकरण नहीं किया तो बड़ा आंदोलन करेंगे।
अधिकारियों की संपत्ति की जांच की मांग
स्कूल संचालकों का आरोप हैं कि मान्यता के लिए 1 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपए जमा करवा और एकाएक मान्यता रद्द करना कोई षड़यंत्र लग रहा है। उन्होंने उन्होंने सभी अधिकारियों की संपत्ति की जांच की मांग की।
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स्कूलों की मान्यता प्रोसेस में ये गड़बड़ियां
एक ही समिति की दो स्कूल: कुछ मामलों में, एक ही समिति द्वारा संचालित दो स्कूलों को समान भूमि आवंटित होने के बावजूद, विभाग ने एक की मान्यता जारी रखी और दूसरे की रद्द कर दी।
सुनवाई में हाजिर को गैरहाजिर: सागर के एक स्कूल संचालक सुनवाई में दो बार हाजिर हुए और हस्ताक्षर भी किए, लेकिन फिर भी उनकी मान्यता ये कहकर रद्द कर दी कि वे गैरहाजिर रहे थे।
विषय नहीं तो प्रयोगशाला क्यों: समितियों का तर्क भी अजब-गजब सामने आया है।कई स्कूलों की मान्यता इस आधार पर रद्द कर दी गई कि उनमें प्रयोगशाला नहीं थी, जबकि उन स्कूलों में विज्ञान संकाय ही नहीं था।
तस्वीरों में भी कड़ा मापदंड: कुछ संचालकों ने लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब और प्रयोगशाला की तस्वीरें जमा कीं, लेकिन उनकी मान्यता यह कहकर रद्द कर दी गई कि तस्वीरें मापदंड के अनुसार नहीं थीं।
स्टाफ की कमी माना आधार: प्रदेश की कई प्राइवेट स्कूलों की मान्यता सिर्फ इस आधार पर रद्द की गई कि स्कूल में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। जबकि छात्रों की दर्ज अनुसार पर्याप्त हैं।
बिल्ट-अप एरिया की समस्या: कई स्कूलों को 600 वर्गफीट से कम बिल्ट-अप एरिया होने का हवाला देकर मान्यता रद्द कर दी, जबकि 660 वर्गफीट क्षेत्र का किरायानामा दिया गया।
जमीन के नियमों में बदलाव: एक स्कूल जिसके पास एक एकड़ जमीन है और उसे 1997 से मान्यता मिली हुई है (जब नियम कहीं भी जमीन होने का था), उसकी मान्यता अब रद्द कर दी गई है।
किराएनामा-लीज मुद्दा: भोपाल के एक स्कूल, जिसके पास निर्धारित मापदंड से अधिक जमीन है और लीज 2027 तक वैध है, फिर भी उसकी मान्यता भी रद्द कर दी गई।
छात्रों का स्थानांतरण गलत: ऑनलाइन आवेदन शुल्क लगभग 1.12 करोड़ रुपये लेने पर भी, छात्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां अंग्रेजी माध्यम की सुविधा नहीं है।
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