Vice President elections 2025: देश के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के कुछ ही दिनों के भीतर चुनाव आयोग ने इस पद के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही चुनाव की तारीखों का एलान भी कर दिया जाएगा।
भाजपा अपने विश्वसनीय नेता को बना सकती है उम्मीदवार
भाजपा इस अहम पद के लिए अपने विचारों से जुड़े किसी वरिष्ठ और विश्वसनीय नेता को उम्मीदवार बना सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत (Thaawarchand Gehlot) सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर (Om Mathur) का नाम भी चर्चा में बना हुआ है।
आयोग ने की तैयारियां शुरू, भाजपा बनाएगी रणनीति
चुनाव आयोग (Election Commission) की ओर से निर्वाचक मंडल, रिटर्निंग ऑफिसर और अन्य तकनीकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा यह प्रयास करेगी कि उम्मीदवार पर पहले से ही सहयोगी दलों की सहमति बना ली जाए, जिससे चुनाव से पहले ही स्थिति साफ हो सके।
धनखड़ ने अचानक दिया इस्तीफा
ध्यान देने वाली बात है कि 21 जुलाई की रात को जगदीप धनखड़ (Former vice President Jagdeep Dhankhar) ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे अगले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था, लेकिन उन्होंने इससे पहले ही पद छोड़ दिया।
थावरचंद गहलोत: अनुभव और सामाजिक समीकरण दोनों में फिट
- वर्तमान में कर्नाटक के राज्यपाल हैं।
- 77 वर्ष के गहलोत राज्यसभा में नेता और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।
- पार्टी की सर्वोच्च इकाई संसदीय बोर्ड के सदस्य रहे हैं।
- दलित समुदाय से आने के कारण जातीय समीकरण में भी उपयुक्त हैं।
- मध्य प्रदेश से आते हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं।
ओम माथुर: मोदी-शाह के करीबी
- सिक्किम के राज्यपाल हैं।
- 73 वर्ष के माथुर राजस्थान से हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं।
- गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी के साथ चुनाव प्रबंधन का अनुभव रहा है।
- आरएसएस के प्रचारक भी रह चुके हैं और अमित शाह के नजदीकी माने जाते हैं।
हरिवंश का नाम भी हो सकता है विकल्प
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, यदि एनडीए में किसी नाम पर सहमति नहीं बनती है, तो राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
विपक्ष की भी तैयारी, टक्कर का प्रत्याशी संभव
भाजपा की रणनीति यह भी होगी कि विपक्ष के संभावित मजबूत प्रत्याशी को देखते हुए एनडीए ऐसा चेहरा उतारे जो अनुभव, कद और सामाजिक समीकरण – तीनों में खरा उतरे।
उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया: 6 मुख्य चरण
चरण 1: लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों का मिलकर निर्वाचक मंडल बनता है।
चरण 2: निर्वाचन आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी करता है जिसमें नामांकन, मतदान और नतीजों की तारीखें तय होती हैं।
चरण 3: उम्मीदवार को नामांकन पत्र भरने के लिए कम से कम 20 सांसदों का समर्थन और 20 सांसदों का प्रस्ताव चाहिए होता है।
चरण 4: प्रचार केवल सांसदों के बीच होता है, क्योंकि वही मतदाता होते हैं।
चरण 5: गुप्त मतदान होता है जिसमें सांसद प्रत्याशियों को पसंद के अनुसार क्रम (1, 2, 3…) में अंकित करते हैं।
चरण 6: मतों की गिनती होती है और 50% से अधिक वोट पाने वाले को विजयी घोषित किया जाता है।
FAQs
सवाल: भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है?
जवाब: उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी निर्वाचित और नामांकित सांसद मिलकर करते हैं। इसमें आम जनता भाग नहीं लेती।
सवाल: उपराष्ट्रपति का चुनाव कितने साल में होता है?
जवाब: हर 5 साल में उपराष्ट्रपति का चुनाव होता है, लेकिन अगर किसी कारणवश पद खाली हो जाए, तो उससे पहले भी चुनाव कराया जा सकता है।
सवाल: क्या आम नागरिक उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकता है?
जवाब: हां, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी योग्यताएं हैं:
- भारत का नागरिक होना चाहिए
- उम्र कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए
- राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए
- 20 सांसदों का प्रस्तावक और 20 सांसदों का अनुमोदन (समर्थन) जरूरी है
सवाल: उपराष्ट्रपति का चुनाव कौन कराता है?
जवाब: भारत का निर्वाचन आयोग इस चुनाव की प्रक्रिया को संचालित करता है।
सवाल: उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान किस प्रकार होता है?
जवाब: यह चुनाव गोपनीय बैलेट वोटिंग (गुप्त मतदान) के जरिए होता है और इसमें अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation by Single Transferable Vote) अपनाई जाती है।
सवाल: अगर उपराष्ट्रपति पद के लिए सिर्फ एक ही उम्मीदवार हो तो?
जवाब: अगर केवल एक ही योग्य उम्मीदवार नामांकन भरता है और कोई विरोध में नहीं होता, तो उसे बिना चुनाव के निर्विरोध उपराष्ट्रपति घोषित कर दिया जाता है।
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