Bihar Vidhan Sabha: कुछ ही देर में आज विधानसभा का शीत सत्र शुरू होने वाला है। इस बीच, पटना में आंगनबाडी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर बिहार विधानसभा का कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें कीं। वहीं, प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता बेहोश हो गई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया।
वहीं, कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर राजद सांसद मनोज झा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में हर किसी को सरकार के सामने अपनी बात रखने का अधिकार है। सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान भी देना चाहिए…वर्तमान बिहार सरकार में लोगों की मांगों को गंभीरता से लिया जाता है और उस पर चर्चा की जाती है…’
बिहार सरकार आज विधानमंडल के दोनों सदनों में जाति आधारित गणना की संपूर्ण रिपोर्ट पेश करने वाली है। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी इसे पेश करेंगे। विधानसभा में इसे दूसरी पाली में सदन के पटल पर रखा जाएगा। विधान परिषद में भी मंगलवार को रिपोर्ट पेश होगी।
पेश होंगे जातिगत जनगणना रिपोर्ट के आर्थिक आंकड़े
इससे विभिन्न जातियों की अमीरी-गरीबी का पता चलेगा। जाति आधारित गणना के जाति संबंधी आंकड़े दो अक्टूबर को जारी किए गए थे। तीन अक्टूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नौ दलों के नेताओं की बैठक बुलाई थी। गणना को लेकर सभी दलों में एक राय थी। सर्वदलीय प्रतिनिधमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राष्ट्रीय जनगणना में जाति गणना को भी शामिल कराने का आग्रह किया था।
केंद्र के इंकार के बाद राज्य सरकार ने अपने साधन से जाति आधारित गणना का निर्णय किया। तीन अक्टूबर की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा था शीतकालीन सत्र में सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े रखे जाएंगे। रिपोर्ट में यह भी जानकारी रहेगी कि सरकारी नौकरियों में विभिन्न जातियों की कैसी भागीदारी है। उनकी शैक्षणिक स्थिति क्या है। समझा जाता है कि यह रिपोर्ट समाज के साथ राजनीतिक समीकरण को भी प्रभावित करेगी। पिछड़ों एवं अति पिछडों को संख्या के अनुसार आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग पहले से चल रही है।
फलीस्तीन पर हमले बंद करने की मांग को लेकर हंगामा
गौरतलब है कि बिहार विधानमंडल की कार्यवाही प्रारंभ होने के पूर्व सोमवार को विधानसभा परिसर में भाकपा (माले) ने गाजा (फलीस्तीन) पर हमले बंद करने की मांग को लेकर पोस्टरों के साथ प्रदर्शन किया। माले नेताओं ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला।
पोस्टर पर लिखा गया था- भारत की विदेश नीति को इजरायल-अमेरिका धुरी के समक्ष गिरवी रखना बंद करो। प्रदर्शन के दौरान माले विधायक महबूब आलम ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के पुराने बयान का हवाला देकर कहा कि उन्होंने कहा था कि भारत परंपरागत रूप से फलस्तीन की जनता की आजादी के साथ है।
वाजपेयी जी ने कहा था कि फलस्तीन की कब्जाई जमीन इजरायल को छोड़नी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो फलस्तीन की जनता को जंग का एलान करने का हक है। वहीं, विधानसभा में पहली बार शोक प्रकाश के बाद दो मिनट के मौन के दौरान नारेबाजी हुई। नारेबाजी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर हुई।
मौन के दौरान नारेबाजी
सोमवार को जब विधानसभा का शीतकालीन सत्र आरंभ हुआ तो परंपरा के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष ने जननायकों को आसन से श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद उन्होंने दो मिनट के मौन के लिए सदस्यों से कहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्य खड़े हो गए। इसी दौरान नारेबाजी होने लगी। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को महसूस हुआ कि शायद किसी का नाम छूट गया है।
उन्होंने अपने अधिकारी से इस बारे में पूछा। तब उन्हें स्पष्ट हुआ कि मामला कुछ अलग है। दरअसल, भाकपा (माले) विधायक दल के नेता महबूब आलम मांग कर रहे थे कि इजरायल के आक्रमण में फलस्तीन में जो बच्चे, महिलाएं व निर्दोष मारे गए उनके लिए भी विधानसभा में शोक प्रस्ताव पढ़ा जाए।
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