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हाइलाइट्स
- 50 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत
- हर 10 साल में आता है नया वेतन आयोग
- इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी
8th Central Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने जनवरी 2025 में इसके गठन का प्रस्ताव पारित किया था और अब इसके बिंदु को भी स्वीकृति मिल गई है। यह आयोग अपनी रिपोर्ट 18 महीनों के भीतर पेश करेगा, यानी इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाएंगी। यह निर्णय करीब 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत लेकर आया है।
— PIB India (@PIB_India) October 28, 2025
क्या करेगा 8वां वेतन आयोग
आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे, सेवानिवृत्ति लाभ (Retirement Benefits) और भत्तों (Allowances) की समीक्षा करना है।
- देश की आर्थिक स्थिति (Economic Condition) और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence) की आवश्यकता।
- विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करना।
- गैर-योगदान आधारित पेंशन योजनाओं (Non-Contributory Pension Schemes) की लागत का आकलन।
- राज्य सरकारों के वित्त पर संभावित प्रभाव का अध्ययन, क्योंकि वे आमतौर पर केंद्र की सिफारिशों को अपनाती हैं।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (Central Public Sector Undertakings) और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की वेतन संरचना और कार्य स्थितियों की तुलना।
हर 10 साल में आता है नया वेतन आयोग
केंद्रीय वेतन आयोगों (Central Pay Commissions) का गठन लगभग हर 10 साल में किया जाता है। पिछला यानी 7वां वेतन आयोग 2016 से लागू हुआ था, जिसने कर्मचारियों के वेतन में बड़ा इजाफा किया था। अब 8वां आयोग उसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा, जिससे आने वाले वर्षों में कर्मचारियों की वेतन वृद्धि (Salary Hike) और जीवनस्तर सुधार (Living Standard Improvement) की उम्मीद बढ़ गई है।
कर्मचारियों में खुशी, उम्मीदें बढ़ीं
इस फैसले के बाद सरकारी कर्मचारियों में उत्साह है। कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि महंगाई दर और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए 8वां वेतन आयोग समय की मांग थी।सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोग एक अस्थायी निकाय (Temporary Body) होगा, जिसमें एक अध्यक्ष, एक सदस्य और एक सदस्य-सचिव होंगे। आयोग अपने गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसके बाद कैबिनेट इसे मंजूरी देगी और इसे 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाएगा।
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