49 years of Pakeezah: आज ही के दिन रिलीज हुई थी ‘पाकीजा’, फिल्म को बनने में लग गए थे 15 साल

Pakeezah

Image source- @BombayBasanti

नई दिल्ली। आपको पाकीजा फिल्म का एक डायलॉग जरूर याद होगा। आपके पांव देखे, बहुत हसीन हैं, इन्हें जमीन पर मत उतारिएगा, नहीं तो मैले हो जाएंगे। ये डायलॉग आज अमर हो गया है। इसके साथ ही पाकीजा (Pakeezah) को रिलीज हुए 49 साल हो गए है। फिल्म को 4 फरवरी 1972 को रिलीज किया गया था। इस फिल्म को लेकर कई किस्से हैं। होगी भी क्यों नहीं जिस फिल्म को अपने मूहूर्त से 15 साल बाद रिलीज किया गया हो तो किस्से तो बनेंगे ही।

मशहूर डायलॉग यहां से लिया गया था
पाकीजा के उस अमर डायलॉग की बात करें तो उसे मूल स्क्रिप्ट में नहीं रखा गया था। लेकिन जब सीन फिल्माया जा रहा था और कैमरा मीना कुमारी (Meena Kumari) के पांव पर पहुंचा तो अचानक से डायरेक्टर कमाल अमरोही को एक मुजरे की याद आई। वो मुजरा था चंदेरी नाम की एक सूबसूरत बाई का, जिसे उन्होंने काफी पहले सुना था। उन्होंने शूटिंग रूकवा दी और स्क्रिप्ट में बदलाव करते हुए चंदेरी बाई के मुजरे की वो लाईन जुड़वा दी। जो फिल्म रिलीज होने के बाद अमर हो गया।

फिल्म का नाम कई बार बदला
इस फिल्म को लेकर कई कहानियां है और ये स्वभाविक भी है। दरअसल, फिल्म का मूहूर्त 1957 में हुआ था। लेकिन इसे पंद्रह साल बाद 1972 में रिलीज किया गया। डायरेक्टर कमाल अमरोही (Kamal Amrohi) ने इन पंद्रह सालों में फिल्म का नाम कई बार बदला। पहले इसे “पाकीजा” के नाम से ही बनाया जा रहा था। लेकिन बीच में इसे “लहू पुकारेगा” कर दिया गया था। लेकिन जब फिल्म को रिलीज करने की बारी आई तो अमरोही ने इस फिल्म को एक बार फिर से ‘पाकीजा’ कर दिया।

पत्नी से संबंध खराब होने के बाद डायरेक्टर ने फिल्म को रोक दिया
कमाल अमरोही जब पाकीजा को बनाने की सोच रहे थे। लेकिन उन्हें कोई दमदार नायिका नहीं मिल रही थी जो उनके फिल्म में फिट बैठ सके। इस दौरान उनकी नई-नई शादी भी हुई थी। उनकी पत्नी मीना कुमारी ने कहा कि आप मुझे ही इस फिल्म में क्यों नहीं ले लेते। मीना कुमारी का आईडिया उन्हें पसंद आया। उन्होंने फिल्म बनानी शुरू कर दी। कुछ दिनों तक सबकुछ अच्छा चला। फिल्म आधी शूट भी हो चुकी थी। लेकिन बीच में पति-पत्नी के बीच संबंध खराब हो गए और फिल्म का काम रूक गया।

7 साल बाद फिर से शुरू हुई शूटिंग
सभी को लग रहा था कि अब पाकिजा नहीं बनेगी। कमाल अमरोही भी इसे लेकर काफी परेशान रहते थे। एक दिन वो अपने दोस्त और संगीतकार खय्याम के घर गए। खय्याम की पत्नी जगजीत कौर ने इस दौरान पाकीजा की चर्चा छेड़ दी। उन्होंने कमाल से अनुरोध किया वो फिल्म को दिखाएं। कमाल भी तैयार हो गए। तीनों ने आधी शूट हुई फिल्म को देखा। जगजीत कौर आधी फिल्म को देखकर उत्साहित हो गईं। उन्होंने कहा कि मैं मनाउंगी मीना कुमारी को फिल्म करने के लिए। क्योंकि वह मीना कुमारी की भी अच्छी दोस्त थीं। उन्होंने मीना कुमारी से इस बारे में बात की। मीना ने जगजीत को बताया कि कमाल से उनका संबंध खराब चल रहा है इस कारण से वो इस फिल्म को आगे नहीं कर पाएंगी। लेकिन जगजीत उन्हें मनाती रहीं और अंत में वो कामयाब हो गईं। मीना ने खुद कमाल को पत्र लिखा और कहा कि वो पाकीजा को पूरा करने के लिए तैयार हैं। जिसके बाद फिर से 7 साल बाद इस फिल्म की शूटिंग शुरू की गई।

फिल्म के प्रीमियर पर लोग हो गए थे भावुक
वहीं जब फिल्म को रिलीज किया गया तो उसके प्रीमियर पर मीना कुमारी और कमाल अमरोही दोनों साथ बैठे थे। साथ ही संगीतकार खय्याम और उनकी पत्नी जगजीत कौर भी मौजूद थीं। फिल्म जैसे ही खत्म हुआ मीना कुमारी ने जगजीत कौर को गले लगा लिया और कहा कि तुम्हारे वजह से कमाल का ये सपना साकार हो सका है। लोग वहां भावुक थे। फिल्म इतनी अच्छी बनी थी कि उसने रिलीज के बाद सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

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