2020 तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा: विश्व मौसम संगठन

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 15 जनवरी (भाषा) संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने कहा है कि वर्ष 2020 अब तक दर्ज तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा, जो ‘मानव-प्रेरित’ जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गति को दर्शाता है।

विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) द्वारा सर्वेक्षण किए गए सभी पांच डेटा सेटों की रिपोर्ट में पाया गया कि लगातार लंबी अवधि के जलवायु परिवर्तन की प्रवृत्ति में 2011-2020 सबसे गर्म दशक रहा।

सबसे गर्म सभी छह साल 2015 के बाद के रहे जबकि 2016, 2019 और 2020 सर्वाधिक गर्म शीर्ष तीन साल रहे। तीनों गर्म वर्षों के बीच औसत वैश्विक तापमान में अंतर बहुत कम है। 2020 में औसत वैश्विक तापमान 14.9 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस पर कहा, ‘‘विश्व मौसम संगठन ने पुष्टि की है कि 2020 दर्ज किए गए सबसे गर्म वर्षों में से एक था, जो जलवायु परिवर्तन की लगातार बढ़ती गति की ओर ध्यान आकृष्ट कराता है, जो हमारे ग्रह पर जीवन और आजीविका को नष्ट कर रहा है।’’

उन्होंने बताया कि दुनिया के हर क्षेत्र में और हर महाद्वीप में पहले से ही असामान्य मौसम की चरम सीमा देखी जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘इस सदी में तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की भयानक वृद्धि होने जा रही है।’

उन्होंने कहा, “प्रकृति के साथ तालमेल बैठाना 21वीं सदी का निर्णायक कार्य है। यह हर जगह, हर किसी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।’’

पिछले साल के अंत में शुरू हुए ला नीना के 2021 के शुरुआती-मध्य हिस्से तक जारी रहने का अनुमान है।

डब्ल्यूएमओ के ‘ग्लोबल एनुअल टू डिकेडल क्लाइमेट अपडेट’ के अनुसार, ऐसी आशंका है कि 2024 तक औसत वैश्विक तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा।

मौसम केंद्र के वार्षिक वैश्विक तापमान पूर्वानुमान में बताया गया है कि साल 2021 भी पृथ्वी के सबसे गर्म वर्षों में से एक होगा।

भाषा कृष्ण कृष्ण मनीषा अमित

अमित शाहिद

शाहिद

Share This

0 Comments

Leave a Comment

2020 तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा: विश्व मौसम संगठन

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 15 जनवरी (भाषा) संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने कहा है कि वर्ष 2020 अब तक दर्ज तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा, जो ‘मानव-प्रेरित’ जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गति को दर्शाता है।

विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) द्वारा सर्वेक्षण किए गए सभी पांच डेटा सेटों की रिपोर्ट में पाया गया कि लगातार लंबी अवधि के जलवायु परिवर्तन की प्रवृत्ति में 2011-2020 सबसे गर्म दशक रहा।

सबसे गर्म सभी छह साल 2015 के बाद के रहे जबकि 2016, 2019 और 2020 सर्वाधिक गर्म शीर्ष तीन साल रहे। तीनों गर्म वर्षों के बीच औसत वैश्विक तापमान में अंतर बहुत कम है। 2020 में औसत वैश्विक तापमान 14.9 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस पर कहा, ‘‘विश्व मौसम संगठन ने पुष्टि की है कि 2020 दर्ज किए गए सबसे गर्म वर्षों में से एक था, जो जलवायु परिवर्तन की लगातार बढ़ती गति की ओर ध्यान आकृष्ट कराता है, जो हमारे ग्रह पर जीवन और आजीविका को नष्ट कर रहा है।’’

उन्होंने बताया कि दुनिया के हर क्षेत्र में और हर महाद्वीप में पहले से ही असामान्य मौसम की चरम सीमा देखी जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘इस सदी में तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की भयानक वृद्धि होने जा रही है।’

उन्होंने कहा, “प्रकृति के साथ तालमेल बैठाना 21वीं सदी का निर्णायक कार्य है। यह हर जगह, हर किसी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।’’

पिछले साल के अंत में शुरू हुए ला नीना के 2021 के शुरुआती-मध्य हिस्से तक जारी रहने का अनुमान है।

डब्ल्यूएमओ के ‘ग्लोबल एनुअल टू डिकेडल क्लाइमेट अपडेट’ के अनुसार, ऐसी आशंका है कि 2024 तक औसत वैश्विक तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा।

मौसम केंद्र के वार्षिक वैश्विक तापमान पूर्वानुमान में बताया गया है कि साल 2021 भी पृथ्वी के सबसे गर्म वर्षों में से एक होगा।

भाषा कृष्ण कृष्ण मनीषा अमित

अमित शाहिद

शाहिद

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password