Doordarshan: कैसे छोटे से डिबिया में समाई पूरी दुनिया ! ब्लैक एंड व्हाइट चलचित्रों का प्रसारण, क्या आपको याद है 63 साल पुराना अपना दूरदर्शन

पुरानी पीढ़ी का प्यारा दूरदर्शन आज के दिन 15 सितंबर 1959 के दिन सरकारी प्रसारक के तौर पर सामने आया वही आज नए दौर में उसका इतिहास भुनाया नहीं जा सकता।

Doordarshan: कैसे छोटे से डिबिया में समाई पूरी दुनिया ! ब्लैक एंड व्हाइट चलचित्रों का प्रसारण, क्या आपको याद है 63 साल पुराना अपना दूरदर्शन

Doordarshan: रंग बिरंगी दुनिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म जहां पर लोगों की आज पसंद बन चुके है वहीं पर आज नेटफ्लिक्स, मोबाइल जैसी चीजों की कल्पना के आगे कुछ नजर नहीं आता है ऐसा ही हमारा 1990 का दशक था जहां पुराने दौर में मनोरंजन का असली मजा एक साथ मिलकर होता था। वहीं दूरदर्शन का आना लोगों के लिए एक सपने जैसा हो गया था। पुरानी पीढ़ी का प्यारा दूरदर्शन आज के दिन 15 सितंबर 1959 के दिन सरकारी प्रसारक के तौर पर सामने आया वही आज नए दौर में उसका इतिहास भुनाया नहीं जा सकता।

आइए आगे बढ़ते दूरदर्शन की कैसे हुई शुरूआत

पुराना दौर जहां पर लोगों के पास टेलीविजन नहीं होता था कम ही होता था तो ऐसे दौर में चलती बोलती तस्वीरें दिखाई देतीं और जो बिजली से चलता था। बाइस्कोप भी इसी जमाने की देन है जिसके चलचित्र के जरिए लोग रंग-बिरंगी मनोरंजन की दुनिया देख सकते थे। टेलीविजन नहीं होने के इस दौर में लोग जिस घर में टीवी होती थी उस घर में ही दूर-दूर से देखने के लिए आते थे। अब दूरदर्शन की बात की जाए तो, सबसे पहले ये उस दौरान आया जब तत्कलीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद थे जिन्होने नई दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो द्वारा स्थापित भारत के पहले टीवी स्टेशन (15 सितंबर 1959 को) का उद्घाटन किया। सरकार ने लॉन्च के लिए दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर दो दर्जन टीवी सेट लगाए थे। सभी जगहों पर भारी भीड़ देखी गई थी। कुछ देर के लिए इस सरकारी चैनल प्रसारक पर कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। जिसे आगे चलकर नियमित किया जाने लगा।

आकाशवाणी के आने से हुआ नियमित प्रसारण

आपको याद होगा जब दूरदर्शन के साथ आकाशवाणी या ऑल इंडिया रेडियो 1965 में साथ आया तब कार्यक्रमों का नियमित प्रसारण होता था। दूरदर्शन शहरों ही नहीं गांवों तक अपनी पहचान बना चुका था। राष्ट्रीय प्रसारण की बात करें, तो इसकी शुरुआत 1982 में हुई थी। इसी साल दूरदर्शन का स्वरूप रंगीन हो गया। पहले यह ब्लैक एंड व्हाइट हुआ करता था। दूरदर्शन के साथ आपको एंटीना का तालमेल याद ना हो तो बताते चलें कि, एंटीना हर घरों पर उस दौर में सिग्नल का काम करता था जिसका होना मतलब अब कार्यक्रम सही से देखने के लिए मिलेगे। इसके रोचक किस्से बताए तो, घर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा उसपर लगे ‘एंटीना’ से लगाया जाता था। शाम के वक्त ‘एंटीना’ की दिशा बदलना और चिल्लाकर पूछना ‘आया’ इस बात का संकेत होता था कि फलाने घर में टेलीविजन पर तस्वीर साफ नहीं आ रही है। ये बातें पुरानी जरूर हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों के जहन में आज भी ताजा हैं।

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जब रंगीन हुआ अपना दूरदर्शन

पुरानी फिल्मों का प्रसारण जहां पर ब्लैक एंड व्हाइट होता था वहीं पर पुराने दौर का अपनापन इसमें समाया था। उस दौर में 25 अप्रैल 1982 की बात है हमारा दूरदर्शन अब ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन हो गया था। आकाशवाणी के अलग होते ही शुरुआत में यूनेस्को की मदद से दूरदर्शन पर हफ्ते में दो दिन केवल एक-एक घंटे के कार्यक्रम प्रसारित हुआ करते थे। जिनका प्रमुख उद्देश्य लोगों को जागरुक करना था। फिर 1965 में रोजाना प्रसारण शुरू हुआ। इसके बाद टेलीविजन पर समाचार आने लगे। कृषि दर्शन भी आया, जो आज के समय में भी दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों पर प्रसारित होता है। चित्रहार, रंगोली, प्राइम टाइम मानों दूरदर्शन की पहचान बने हुए थे। वाह क्या दौर था। धीरे-धीरे बढ़ते समय के साथ हमारा दूरदर्शन अपडेट होता गया।

1980 का दशक याद होगा

यहां पर 1980 दशक में दूरदर्शन में धार्मिक और विज्ञान के सीरियलों ने जगह ले ली। इसपर प्रसारित होने वाला पहला सीरियल 'हम लोग' था। इसके बाद इसपर 'रामायण' और 'महाभारत' जैसे पौराणिक सीरियल आए, जिन्हें खूब लोकप्रियता मिली। उस दौर में इन सीरियलों की पसंद इतनी थी कि, घरों में लोग होते थे और सड़के वीरान हो जाती थी। आज डिजिटल दुनिया में अनगिनत मनोरंजन के साधन और प्लेटफॉर्म आ गए हो लेकिन हमारा दूरदर्शन आज भी हमारे दिलों में राज करता है। पुराना दौर का सबसे अच्छा साथी दूरदर्शन हमारे साथ रहा है।

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