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Weather जोरदार बारिश के बाद भी बढ़ी उमस

मौसम ने दो चार दिनों से करवट ली है। कई दिनों की गर्मी के बाद दो दिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जोरदार बारिश हुई है। मौसम विभाग ने आज भी जोरदार बारिश की संभावना जताई है। दो दिनों की बारिश ने कई किसानों की फसल को बर्बाद कर दिया है। बारिश के बावजूद उमस बढ़ी है। 



एमपी के शहरों का अधिकतम तापमान 


मध्यप्रदेश के कई राज्यों में दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार आज भी बारिश की संभावना है। देर रात कई इलाकों में जोरदार बारिश हो सकती है। दो दिनों की बारिश के बाद भी उमस बनी हुई है। भोपाल का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस, इंदौर 33.2, उज्जैन 35.0, रीवा 31.4, उमरिया 32.0 खजुराहो 35.0, सागर 33.0 ग्वालियर 37.1, होशंगाबाद 33.0 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान है।


छत्तीसगढ़ के शहरों का अधिकतम तापमान


राजधानी रायपुर में 3 दिन से लगातार बारिश का दौरा जारी है। बारिश के बाद आम लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि मानसून के अंतिम वक्त में हुई बारिश के बाद आम लोगों को उमस और गर्मी से थोड़ी राहत भी मिली है। शहर के राजेंद्र नगर, प्रोफेसर कॉलोनी समेत कई अन्य इलाकों में जलजमाव की वजह से स्थानीय लोगों को परेशानी बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अगले कई दिनों में तक भारी बारिश का अनुमान है। रायपुर का अधिकतम तापमान 30.3, अंबिकापुर 29.0, बिलासपुर 29.0, पेंड्रा रोड 28.3, जगदलपुर 29.6 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान है।  

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कांग्रेस अब अपने लोगों को विचार का पाठ पढ़ाएगी। पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को ये बताएगी कि उनके महापुरुष कैसे थे। वो पार्टी से किस रुप में जुड़े थे और उनके विचार क्या थे। इसके लिए आजादी के दौर के क्रांतिकारियों के पन्ने पलटे जाएंगे। कांग्रेस को ऐसा लगता है कि उसकी पार्टी के महापुरूषों को तो पिछले तीन सालों में हाशिए पर धकेल दिया गया है और गुणगान केवल संघ और बीजेपी के नेताओं का हो रहा है। कांग्रेस को ये भी लगता है कि ये बीजेपी अपने संगठन से जुड़े नेताओं को जबरिया महान बनाने में जुटी है। वैसे विश्लेषक इसे कांग्रेस की गांधी फैमिली वाली इमेज से निकलने की कोशिश भी मान रहे हैं।


कांग्रेस अब ब्लाक स्तर के प्रशिक्षण वर्ग में अपने नेताओं को उपलब्धियों को कार्यकर्ताओं को बताने वाली है। ये कुछ ऐसा ही है जैसे बीजेपी करती है। बीजेपी का हर प्रशिक्षण वर्ग ना तो दीनदयाल के नाम के बगैर पूरा होता है ना सावरकर और ना ही अटल बिहारी वाजपेयी। कहीं ना कहीं बीजेपी के संगठित रहने का फॉर्मूला भी यही है। कांग्रेस सोच रही है कि जब कार्यकर्ता जनता के बीच जाएंगे तो जनता को वो अपने नेताओं के बारे में बताएंगे जैसा बीजेपी करती है हालांकि बीजेपी को कांग्रेस की ये सोच दकियानूसी लगती है।


वैसे तो महापुरुषों की लड़ाई तो तीन साल पहले से ही शुरु हो चुकी है बाबा साहेब अंबेडकर और सरदार पटेल को बीजेपी को अपना लिया है। पीेएम मोदी जितनी बार दीनदयाल उपाध्याय का जिक्र करते दिखे हैं। उतनी ही बार महात्मा गांधी का नाम भी जुबां पर आया है। सरदार पटेल और अंबेडकर को बीेजेपी ये कहकर याद करती है कि कांग्रेस ने इन्हें भुला दिया। ऐसे में कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता का मनोबल कैसे बढ़े। इसलिए अब कांग्रेस बीजेपी को उसी की रणनीति से मात देने की कोशिश में है। हालांकि ये एक लंबी प्रक्रिया है कांग्रेस कामयाब कितनी होगी ये कहना मुश्किल है।




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