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Weather बारिश के बाद मौसम हुआ सुहाना


पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के भोपाल, इंदौर के जिलों में ज्यादातर स्थानो पर, वहीं उज्जैन के जिलों में कई जगहों पर बारिश हुई। इसके अलावा रीवा के जिलों में कुछ स्थानो पर बारिश हुई। बाकी शेष बचे प्रदेश का मौसम साफ रहा। वहीं बात की जाए अगर प्रदेश में सबसे अधिक तापमान की तो, 40 डिग्री सेल्सियस तापमान प्रदेश के नौगांव में दर्ज हुआ।


मध्यप्रदेश का तापमान

भोपाल का अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, इंदौर का अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबलपुर का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, ग्वालियर का अधिकतम तापमान 38.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।


छत्तीसगढ़ का तापमान

रायपुर में अधिकतम तापमान 37.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, बिलासपुर का अधिकतम 37.7 तापमान डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जगदलपुर का अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, अंबिकापुर का अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

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किसानों की समस्याओं की गूंज पूरे देश में गूंज रही है और अन्नदाता की इस नाराजगी को सरकारें किसानों के कर्जमाफी के जरिए दूर करने की कोशिश में हैं। यूपी, कर्नाटक, पंजाब के बाद अब महाराष्ट्र ने भी कर्जमाफी का एलान किया है, लेकिन सवाल ये है कि क्या कर्जमाफी के अलावा किसानों की हालात सुधारने कोई विकल्प नहीं बचा है ?


इन दिनों देशभर में किसानों की कर्ज माफी को लेकर बहस जोरों पर है। यूपी में छोटे किसानों की कर्ज माफी  से शुरू हुआ सिलसिला दूसरे राज्यों में भी पहुंच चुका है। बीते तीन महीने में 4 राज्य कर्ज माफी का ऐलान कर चुके हैं। पहले यूपी, फिर कर्नाटक, फिर पंजाब और अब महाराष्ट्र। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसान आंदोलन के बाद महाराष्ट्र ने भी 34 हजार करोड़ रुपए का लोन माफ करने का फैसला लिया है। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के 1.5 लाख रुपये तक के कृषि कर्ज की माफी की घोषणा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में 2012 से सूखे की स्थिति है और उसके बाद से कई किसान कर्ज नहीं चुका पाए हैं।


एक तरफ खेती को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की आय़ दोगुनी करने की बात हो रही है। वहीं किसान बैंकों के कर्ज के बोझ तले दबकर कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं, और कई राज्य इस पर चल भी पड़े हैं। हालांकि केंद्र सरकार साफ कह चुकी है कि अगर राज्यों को कर्ज माफ करना है तो ये बोझ उसे खुद ही वहन करना पड़ेगा।


बहरहाल बड़ा सवाल है क्या कर्ज माफी वाकई किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान है, या फिर महज फौरी राहत है। ये सवाल बहस का विषय हो सकता है, जब किसान उग्र होता है और आंदोलन पर आमादा होता है तो कर्ज माफी से बेहतर उपाय सरकारों को दिखाई नहीं देता। सवाल ये है कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारें क्यों कुछ सोच नहीं पाती, या फिर सोचना नहीं चाहती।  




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