'राजनीति'

मध्यप्रदेश: दांव पर प्रतिष्ठा, उम्मीदवारों के साथ-साथ मैदान में कूदे दिग्गज, थम गया पहले चरण के प्रचार का शोर, किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा?

27 Nov 2014

नगरीय निकाय चुनाव के लिए आज से दूसरे चरण के लिए चुनावी सभाओं को दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस बीजेपी दोनों ही पार्टियां जीत के लिए पूरी ताकत लगा रही है। वहीं पहले चरण के लिए प्रचार का शोर खत्म हो चुका है। पहले चरण में 9 नगर निगमों में चुनाव होंगे और दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। जीत के दावे दोनों ही दलों की तरफ से हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार निकाय चुनाव को विधानसभा की तर्ज पर करवाने का फैसला किया, तो प्रचार भी उसी अंदाज में हुआ। रणनीति भी वैसी ही बनाई गई। फर्क इतना था कि, चुनाव में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की आमद नहीं हुई, मगर प्रदेश स्तर के नेता तो चुनाव में लगातार जोर लगाते देखे गए। विंध्य की बात करें तो यहां मेयर की तीन सीटों पर चुनाव दिलचस्प है। क्षेत्र में बीएसपी का खासा प्रभाव है। रीवा में बीजेपी के चुनाव प्रबंधन की कमान उर्जा और जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ल के हाथ में रही। पिछले चुनाव में बीजेपी के शिवेंद्र सिंह काफी कम वोटों से जीते थे। इसलिए जीत के लिए शुक्ल जोर लगाते देखे गए। बीजेपी ने इस बार ममता गुप्ता तो कांग्रेस ने प्रियंका तिवारी को टिकट दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रीनिवास तिवारी अपनी भतीजी कविता पांडे के लिए टिकट मांग रहे थे, टिकट नहीं मिला तो कविता निर्दलीय चुनाव लड़ रही है। जिससे मुकाबला दिलचस्प बन गया है।


दांव पर दिग्गजों की साख
 
बुंदेलखंड की सागर सीट जहां टिकट के एलान के बाद ही बगावत के सुर सुनाई दिए थे। इसका जिम्मा परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह के हाथ है। उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है, पार्टी ने बिल्डर अभय दरे को टिकट दिया है। दरे का विरोध स्थानीय ईकाई कर रही थी, लेकिन भूपेंद्र सिंह के चुनाव प्रबंधन की कमान संभालने के बाद स्थितियां थोड़ी बदली है। ग्वालियर में बीजेपी ने पूर्व मेयर विवेक शेजवलकर को टिकट दिया है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यहां जोरदार प्रचार किया। पीछे माया सिंह भी नहीं रही। प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की प्रतिष्ठा खंडवा में दांव पर है। चौहान ने मेयर का टिकट सुभाष कोठारी को दिलवाया। जबकि मंत्री विजय शाह राजेश डोंगरे के लिए टिकट चाहते थे। चौहान के सामने बुरहानपुर भी प्रतिष्ठा का सवाल है। सिंगरौली में मंत्री ज्ञान सिंह कमान संभाले रहे। पार्टी ने विधायक रामल्लू वैश्य को भी कमान सौंपी। बीजेपी प्रत्याशी प्रेमवती खैरवार को टिकट इन्हीं दोनों नेताओं ने दिलवाया था। यहां पिछली बार बसपा जीती थी। इसलिए बीजेपी ने वनवासी कल्याण परिषद की भी मदद ली। हालांकि बीएसपी ने रामजनी खैरवार को मैदान में उतारकर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया। दिग्गज अब जीत का दावा जरूर कर रहे हैं। 

कांग्रेस की तरफ से जीत का दावा

कांग्रेस की बात की जाए तो कांग्रेस में प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव की प्रतिष्ठा दांव पर है। जिन्होंने ताबड़तोड सभाएं ली। सज्जन सिंह वर्मा भी उनके साथ रहे। जिन्होंने टिकट बांटने में अहम भूमिका निभाई। बाकी नेताओं ने प्रचार से दूरियां बना ली। मगर ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा ग्वालियर में जरूर दांव पर लगी है। सिंधिया ने अपने क्षेत्र में पार्टी को जिताने के लिए दम लगाया। कांग्रेस प्रत्याशी दर्शन सिंह के समर्थन में सभाएं ली। दूसरी तरफ जहां महिला कांग्रेस के कोटे से टिकट दिए गए। वहां राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा भी पहुंची। महिला कांग्रेस से जहां टिकट दिया है। वहां आपसी गुटबाजी चरम पर है। सुरेश पचौरी भी इक्का दुक्का जगह सभाएं लेने पहुंचे। हालांकि जीत का दावा कांग्रेस की तरफ से भी है। 

विधायक और सांसदों ने लगाया जोर

कुल मिलाकर इस चुनाव में प्रत्याशियों के साथ साथ क्षेत्रीय विधायक और सांसदों ने भी पूरा जोर लगाया है। बीजेपी ने साफ तौर पर जनप्रतिनिधियों को कमान सौंप दी थी। मगर कांग्रेस में प्रचार की कमान इक्का दुक्का नेताओं के ही हाथों में रही। अब गेंद जनता के पाले में पहुंच चुकी है। 28 नवंबर को जनता इन सभी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला कर देगी।


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