आज का मुद्दा

मैं शपथ लेता हूँ !

12 Jul 2018



मध्य प्रदेश में कांग्रेस अपने नेताओं-कार्यकर्ताओं को शपथ दिला रही है। ऐसा संभवत: पहली बार है कि किसी अध्यक्ष ने अपने पहली कार्यकारिणी की बैठक में पीसीसी पदाधिकारियों को शपथ दिलाई हो, वो भी शपथ-पत्र के साथ। वैसे संकल्प बेहतर मध्य प्रदेश बनाने का था, लेकिन इसमें गुटबाजी से तौबा करने की भी कसम थी। इतना ही नहीं इसमें बीजेपी को किन मुद्दों पर घेरना है ये भी मौजूद था।


ये तो पीसीसी में शपथ की बात हुई, मैदान में भी कसम खिलाने में पार्टी पीछे नहीं है। इस काम को अंजाम दे रहे हैं समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह। वो जहां जा रहे हैं। पंगत में संगत कर रहे हैं। अन्न की कसम खिला रहे हैं। सबको साथ रहने का मैसेज दे रहे हैं। ऐसा करने की नौबत क्यों पड़ रही है, तो जवाब तीन बार से पार्टी की हार है।


जमीनी स्तर पर कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है और शायद यही वजह है कि इससे पार पाने के लिए शपथ का सहारा लिया जा रहा है। राजनीतिक वार-पलटवार तो होते रहेंगे, सवाल भी पूछे जाएंगे।  लेकिन शपथ के असर की बात करें तो धार की ये तस्वीर देखनी बहुत जरूरी हो जाती है। 


जिस कांग्रेस में क्षत्रपों के नारे पहले लगते रहे हों, वहां पार्टी का नारा पहले गूंज रहा है। बदलाव ने दस्तक तो दे दी है, मगर चुनौती कम नहीं है।


कांग्रेस की शपथ, डबरा सम्मेलन की याद भी दिलाता है। एकजुटता के लिए किए गए उस सम्मेलन के बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई थी। सवाल ये है कि क्या कांग्रेस, अंगद के पांव की तरह खड़ी बीजेपी को उखाड़ पाएगी ?


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