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1 स्कूल, 4 कमरे, 400 बच्चियां, न बैठने को जगह, न पढ़ाने को स्टाफ

7/9/2018 12:00:00 AM



देपालपुरः सूबे की सरकार शिक्षा को लेकर चाहे लाख बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन आए दिन मामले सामने आ ही जाते हैं, जो इन दावों की हकीकत बया कर देते हैं। उसी कड़ी में देपालपुर का भी नाम जुड़ गया, जहां शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल अपनी बदहाली पर पिछले 19 साल से रो रहा है। जर्जर भवन के 4 कमरों में 4 सौ छात्राएं पढ़ने को मजबूर हैं, जबकि पूरे स्कूल में एक भी साफ सुथरा टॉयलेट नहीं है।


दरअसल, स्थानीय लोगों की मांग पर 1999 में कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल खोलने के आदेश जारी होने के बाद पहले से चल रहे मिडिल स्कूल में कक्षाएं शुरू कर दी गईं, लेकिन तब से लेकर अब तक न तो स्कूल को अलग से भवन दिया गया और न ही जरूरतभर का स्टाफ। पूरे स्कूल को चलाने के लिए यहां प्राचार्य को मिलाकर महज 6 शिक्षक ही पदस्थ हैं, जबकि 11 शिक्षकों की जगह खाली पड़ी है।


राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत यहां 10 शौचालय बनाने के लिए 1 लाख 91 हजार रुपए स्वीकृत हुए थे और काम जनवरी  2017 में शुरू हुआ था, लेकिन आज तक निर्माण पूरा नहीं हुआ। वहीं, शासन ने स्कूल भवन के लिए लगभग 8 माह पूर्व 1 करोड 75 लाख रूपये मंजूर किए थे। लेकिन निर्माणकार्य अब तक शुरू ही नहीं किया जा सका है। सूबे में सरकारी काम किस तरह किए जाते हैं। अगर आपको ये जानना हो, तो अपनी बदहाली पर आंसू बहाते इस जर्जर स्कूल को जरूर याद कीजियेगा। 


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