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वन अमले की हड़ताल से करोड़ों का चूना, अवैध कारोबारियों की बल्ले बल्ले

06 Jun 2018


मध्यप्रदेश के वन कर्मचारी पिछले 14 दिनों से हड़ताल पर है। हड़ताल का असर अब दिखाई देने लगा है। जंगल महफूज नहीं रहे तो वो लोग भी सक्रिय हो गए है जो सरकार को कौड़ी थमाकर करोड़ों के वारे न्यारे कर रहे है, क्योंकि जिनके हाथों में मॉनिटरिंग की कमान है वो वन विभाग की तकनीकी भाषा ही नहीं समझते। 


ट्रक में लकड़ी भरी गई डिपो में मौजूद कर्मचारी ने साइन किए और ट्रक रवाना हो गया। मगर ट्रक में कितनी घनमीटर लकड़ी भरी गई ? क्या ट्रक में ज्यादा लकड़ी लाद दी गई ? कौन बताएगा।  जवाब है, कोई नहीं। क्योंकि जो शख्स डिपो से कटिंग पास जारी कर रहा है उसे तकनीकी रूप से कुछ पता ही नहीं, क्योंकि वो चौकीदार है। 


डिपो में कितनी लकड़ी है, कौन सी लकड़ी है इसके बारे में डिपो प्रभारी को पता होता है जो इस समय हड़ताल पर है। जंगल की लकड़ी बाजार तक पहुंचती कैसे ही इसकी प्रक्रिया समझे। 


-दीवाली के बाद जंगल में बांस और लकड़ी की कटाई होती है।

-कटी हुई लकड़ी डिपो में लाई जाती है।

-जिसका पूरा हिसाब रखा जाता है। 

-बारिश से पहले डिपो से लकड़ी का नियमों के मुताबिक परिवहन होता है


डीएफओ से जब पूछा गया कि नियमों का मखौल उड़ रहा है, तो डीएफओ मीडिया पर गलत खबरें देने का आरोप लगाते हुए कुर्सी छोड़कर भाग निकले। साफ है कि अधिकारियों से हालात संभल नहीं रहे। वन कर्मचारियों को इस हड़ताल से कितना फायदा होगा ये तो नहीं पता मगर हड़ताल से जंगलों के दुश्मनों की बल्ले बल्ले होती नजर आ रही है और सरकार को लाखों का नुकसान हो रहा है, सो अलग।


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