'देश'

मुजफ्फर नगर दंगे के आरोपियों पर से 131 मुकदमे वापस लेगी योगी सरकार, विपक्ष ने जताई नाराजगी

3/22/2018 12:00:00 AM

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुजफ्फर नगर दंगे के आरोपियों पर से 131 मुकदमे वापस लेना शुरू कर दिए है। इन मुकदमों में हत्या के 13 और हत्या के प्रयास के 11 मामले शामिल हैं। 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुए व्यापक दंगों में पांचसौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मिताबिक, केस से जुड़े दस्तावेजों से साबित होता है कि, सभी केस जघन्य अपराध में आते हैं, जिसमें कम से कम सात साल की सजा होती है। 16 मुकदमे सेक्शन 153 ए यानी धार्मिक आधार पर दुश्मनी फैलाने के आरोप और दो मुकदमे सेक्शन 295 के दर्ज हैं, यानि किसी धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले भाषण देने का आरोप है।


मुजफ्पर नगर में हुए इन दंगों में करीब 63 लोगों की जान गई थी, साथ ही करीब 50,000 से ज्यादा लोग घर छोड़ने पर मजबूर हुए थे। सितंबर 2013 में हुए इस दंगे के बाद 1455 लोगों के खिलाफ 503 केस दर्ज हुए थे। तब समाजवादी सरकार थी। भाजपा सांसद संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक के नेतृत्व में खाप पंचायतों के प्रतिनिधिमंडल ने पांच फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें 179 केस की लिस्ट सौंपकर वापस कराने की मांग की थी, जिसके बाद से हरकत में आई सरकार ने मुकदमों की वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


बता दें कि, एक मीडिया रिपोर्ट ने ये दावा किया है कि, उन्हें संजीव बालियान ने बताया कि, उन्होंने जो सूची मुख्यमंत्री को सौंपी थी, उनमें सभी आरोपी हिंदू थे। बता दें कि, 23 फरवरी को उत्तर प्रदेश के कानून विभाग ने विशेष सचिव राजेश सिंह के हवाले से मुजफ्फरनगर और शामली के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर 131 मुकदमों के संबंध में 13 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। डीएम से केस हटाने को लेकर संस्तुति मांगी गई थी। सूत्रों के मुताबिक शासन से आए पत्र को डीएम ने जिले के एसपी के पास भेजकर डिटेल्स देने को कहा।

इस बारे में जब प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मेरे पास कोई जानकारी नहीं है, राज्य का कानून विभाग ऐसे मामलों को देख रहा है। कानून विभाग के भी विशेष सचिव ने टिप्पणी से इन्कार कर दिया, हालांकि सूत्रों ने मुकदमा वापसी के लिए शासन से पत्र जाने की पुष्टि की। 



"रूल ऑफ रिलीजन" पर काम कर रही है सरकारः औवेसी


मामले को लेकर (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन औवेसी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि, ये हिंन्दुत्व तृष्टीकरण है। उन आरोपियों में कई बीजेपी के सांसद और एमएलए के नाम भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि, उत्तर प्रदेश में संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है। सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए, जिनकी वजह से 63 जाने गईं और 50,000 लोग अपने घरों को छोड़ने को मजबूर हुए। औवेसी ने कहा कि, सुप्रीमकर्ट ने स्पेशल कोर्ट बनाने की बात कही है, लेकिन ये लोग इससे पहले ही इन्हें बचाने में लग गए है। उन्होंने ये भी कहा कि, यूपी में "रूल ऑफ लॉ" नही बल्कि, "रूल ऑफ रिलीजन" चल रहा है।


Select Rate

Post Comment
 
Enter Code:
सम्बधित खबरे

देखें अन्य वीडियो

देखें अन्य फोटो