'दुनिया'

अब श्रीलंका में भड़की सांप्रदायिक हिंसा, 10 दिनों तक आपातकाल लागू

3/6/2018 12:00:00 AM

दुनिया के कई देश इस समय सांप्रदायिक दंगों से जूझ रहे हैं। पहले म्यांमार, फिलिस्तीन, फिर सीरिया, उसके बाद मालदीव में हुए बड़ी सांप्रदायिक हिंसा से ये सभी देश जल रहे हैं। इन्ही हालातों को देखते हुए पूरे विश्व में चिंता का विषय बढ़ता जा रहा है। अब इस कड़ी में भारत से लगे एक और देश श्रीलंका का नाम भी जुड़ गया है। 


दरअसल, श्रीलंका में बौद्ध और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच हिंसा बढ़ती ही जा रही है, जिसके मद्देनजर प्रशासन ने 10 दिनों के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी है। भारत के लिए चिंता की बात ये है कि, भारतीय क्रिकेट टीम भी श्रीलंका में ही मौजूद है। उसे वहां मंगलवार शाम को पहला टी-20 मैच खेलना है। हालांकि वर्तमान हालातों को देखते हुए टीम की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


श्रींलका के कैंडी इलाके में बौद्ध समुदाय और मुसलमानों के बीच भड़की हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई थी। झड़प सबसे पहले शहर के डिगना इलाके में रविवार रात को एक 41 वर्षीय घायल शख्स की अस्पताल में मौत के बाद शुरू हुई। उस पर लोगों के एक समूह ने 22 फरवरी को दो वाहनों से संबंधित घटना को लेकर हमला किया था। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हत्या के मामले में अब तक 24 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 10 आरोपी हत्या में सीधे शामिल हैं। इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन सोमवार की रात से जारी है। हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने थेलदेनिया इलाके में कर्फ्यू लगा दिया था।


सामाजिक सशक्तिकरण मंत्री एसबी दिसानायके ने बताया कि, देश के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़कने के बाद राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना और उनके मंत्रिमंडल ने 10 दिनों के लिए आपातकाल घोषित कर दिया है। दिसानायके ने कहा कि, राष्ट्रपति आगामी 10 दिनों के बाद ही फैसला लेंगे कि, आपातकाल की स्थिति को आगे बढ़ाना है या नहीं। कैंडी जिले के थेलडेनिया और पालेकेल इलाके में आज फिर से कर्फ्यू लगाया गया और भारी हथियारों से लैस विशेष कार्यबल के पुलिस कमांडो की तैनाती की गई है।


तनाव के हालात उस समय पैदा हुए जब सोमवार को कैंडी शहर में एक बौद्ध समुदाय का व्यक्ति और मुस्लिम व्यापारी को आग लगाकर मार दिया गया, इससे वहां सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। पहले भी वहां सांप्रदायिक हिंसा भड़क चुकी है, जिसने बाद में विकराल रूप ले लिया था। आपको बता दें कि, श्रीलंका में करीब 75 फीसदी आबादी बौद्ध सिंघली समुदाय की है, जबकि वहां पर 10 फीसदी मुसलमान है।


कुछ संगठनों ने इस हिंसा के लिए राष्ट्रवादी बौद्ध संगठन बोडू बाला सेना (बीबीएस) ग्रुप को जिम्मेदार माना है। दावा किया जा रहा है कि, ये लोग मुसलमानों के स्वामित्व वाली दुकानों और मस्जिदों पर हमले कर रहे हैं। जून, 2014 में भी मुस्लिम विरोधी अभियान शुरू हुआ गया था जो बाद में हिंसात्मक हो गया और इस हिंसा में कई लोगों की मौत हुई थी। इसी सिलसिले में राष्ट्रपति एम सिरीसेना ने 2015 में सत्ता में आने के बाद मुस्लिम विरोध अपराध को लेकर जांच शुरू करवाई थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।


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