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देश भर में हर हर महादेव, महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना

2/13/2018 12:00:00 AM

शिव, शंकर, भोलेनाथ। भोले तेरे कितने नाम। भगवान शिव की महिमा जितनी कही जाए उतनी कम है। वो देवों के देव हैं इसलिए हर देव से अलग हैं। शायद इसलिए उनके इतने स्वरूप भी हैं। वो भोले नाथ हैं, तो रूद्र का अवतार भी हैं। सृष्टि को साधते हैं, तो काल भी वही है। इसलिए उन्हें महाकाल भी कहा गया है, तो चलिए करते हैं महादेव के इस अद्भुत स्वरूप पर कुछ चर्चा।


‘अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, काल उसका क्या करे, जो भक्त हो महाकाल का।’ आज देवाधिदेव महादेव की भक्ति में डूबे भक्त ने शिवालयों में जलाभिषेक कर भगवान शंकर को प्रसन्न कर रहे है।


महाकाल की पूजा अर्चना कर भोलेनाथ के भोले भक्त धन्य हो उठते है। महाकाल की नगरी की महिमा ही कुछ ऐसी है, कि जो भी वहां जाता है महाकाल की भक्ती में रम जाता है। वैसे तो हर दिन महाकाल का है, लेकिन शिवरात्रि के मौके पर महाकाल के मंदिर की लीला ही न्यारी होती है। वहां भक्तों की भीड़ लगती है, जो अपने आराध्य के दर्शन के लिए घंटो इंतजार करते हैं और महाकाल के दर्शन के बाद लगता है कि, सारे तप सफल हो गए।


उज्जयनी के राजा हैं महाकाल, जिनकी छाया में और भी चमत्कारी शिवलिंग इस शहर की महिमा बढ़ाते हैं। अकेले उज्जैन में ही महादेव के 84 महादेव हैं और हर महादेव की अपनी अलग महिमा है।


उज्जैन नगरी की महिमा जितनी कही जाए उतनी कम है और अब तो मौका शिवरात्रि का है, जिसे वहां नवरात्र की तरह पूरे नौ दिन मनाया जाता है। हर दिन भगवान शिव का एक नया रूप, एक नया अवतार भक्तों के सामने होता है, जिसे देखकर शिव के भक्त उनके इन अनूठे रूपों में कहीं खो से जाते है।


शिव के दर पर शिवराज


भगवान शिव की आराधना का महाशिवरात्रि पर्व आज मनाया जा रहा है। मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। तड़के से ही मंदिरों में ओम नम: शिवाय और महामृत्यंजय आदि मंत्रों और आरती की गूंज सुनाई दी। जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के साथ ही सैकड़ों लोग व्रत रखकर भोले की उपासना कर रहे है। वहीं सीएम शिवराज सिंह चौहान पत्नी साधना सिंह के साथ भोपाल के बड़वाले महादेव मंदिर पहुंचे, यहां उन्होंने विशेष पूजा अर्चना की और प्रदेश के विकास के लिए कामना की। आपको बता दें कि, पंचांगों में पर्व की तिथि को लेकर भिन्नता से लोग बुधवार को भी महाशिवरात्रि मनाएंगे। कई स्थानों पर भंडारे व जागरण होगा।


शिव का अनूठा धाम


अब आपको बताते हैं, बुरहानपुर के असीरगढ़ में भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के बारे में।मंदिर 800 साल पुराना है। मंदिर जितना प्राचीन है, लोगों की आस्था भी उतनी ही गहरी है।

माना जाता है कि, मंदिर का निर्माण महाभारत काल में हुआ था और इस मंदिर के घंटे से ओम की ध्वनि निकलती थी। जानकारों के मुताबिक प्राचीन घंटा अब इस मंदिर में नहीं है, बल्कि अब लंदन का घंटा इस मंदिर में बनता है। जानकारों के मुताबिक असली घंटा अंग्रेज 1855 में लंदन ले गए और लंदन का नकली घंटा इस मंदिर में लगा दिया। पुराणों में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। साथ ही ये आस्था हिंदू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक है।


नर्मदांचल में महाशिवरात्रि की धूम


महाशिवरात्रि का पर्व पुरे नर्मदांचल में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। अलसुबह से ही शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ भगवान् शिव की पूजन के लिए उमड़ती है। सेठानी घाट स्थित प्राचीन काले महादेव मंदिर में भी पिछले चार पांच दिनों से भगवान् शिव का उत्सव मनाया जा रहा है। भगवान् शिव को अलग अलग स्वरूपों में सजाया गया। मंदिर के पुजारी राहुल शर्मा ने बताया की, ५ तारीख को गणेश पूजन,६ तारीख को मंडप और हल्दी की रस्म पूरी की गई। इसके बाद नर्मदा जल से भगवान् शिव का स्नान कराया गया। साथ ही दूध - दही और पञ्चमृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान् शिव का हल्दी से स्नान कराया गया। इसी क्रम में आज भगवान् शिव का विवाह के बाद पुरे शहर में भोलेनाथ की शाही सवारी निकली जाएगी, जिसमे हजारों की संख्या में भक्त शामिल होंगे।


भक्तों की आस्था का केंद्र पशुपतिनाथ मंदिर


अब आपको बताते हैं मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में। जो अष्टमुखी रूप में मंदसौर में विराजित है और जिनके दर्शन के लिए हर दिन यहां लगता है भक्तों का मेला और हर शिवरात्रि पर भावी रौनक देखते ही बनती है।


मंदसौर का प्राचीन पशुपतिनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां विराजित है 8 मुखी पशुपतिनाथ महादेव की अद्भुत प्रतिमा। अष्टमुखी पशुपतिनाथ की प्रतिमा का सौंदर्य अपने-आप में अनूठा है। नेपाल के पशुपतिनाथ में चार मुख की प्रतिमा है, जबकि मंदसौर में प्रतिमा अष्टमुखी है। 75 बरस पहले शिवना की कोख से निकली प्रतिमा विश्व प्रसिद्ध है। प्रतिमा काफी प्राचीन है। अष्टमुखी शिव की ये प्रतिमा करीब 7.3 फीट की है, जो बेहद ही आकर्षक है। प्रतिमा से कई किवदंतियां जुड़ी है, प्रतिमा में बाल्यावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था व वृद्धावस्था के दर्शन होते हैं। इसमें चारों दिशाओं में एक के ऊपर एक दो शीर्ष हैं।


ये मंदिर भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है। भक्त इस प्राचीन प्रतिमा के दर्शन करने को देश-विदेश से पहुंचते है और शिवरात्रि के खास मौके पर तो ये आस्था देखने लायक होती है।


आठ मुखी पशुपतिनाथ मंदिर की रौनक हर दिन अद्भुत होती है, लेकिन शिवरात्रि का दिन यहां की रौनक को दुगुना कर देता है।


12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है ओंकारेश्वर


और अब आपको बताते हैं ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है ओंकारेश्वर में। जिसकी महिमा निराली है। यहां दो भागों में विभक्त होती हैं नर्मदा और करती हैं शिवाभिषेक। कहते हैं, भगवान शिव के ओम स्वरूप के जो दर्शन करता है उसे केदारनाथ के दर्शन जितना पुण्य प्राप्त होता है।


देश की एकमात्र अनूठी प्रतिमा


भगवान शिव का गुणगान करती वैसे तो कई आरतियां है, लेकिन अगर हम आपको ये बताए कि, शिव की ही एक आरती को देख उनकी और मां पार्वती की मूर्ति बनाई गई है, तो जानकर हैरानी होगी। यहां की शिव मूर्ति प्राचीन होने के साथ साथ एक ही पत्थर पर तराशी गई है। 16 वीं शताब्दी में एक खेत से मिली ये मूर्ति आज एक मंदिर में विराजित है। मूर्ति के दर्शन के लिए आपको जाना होगा होशंगाबाद जिले के सोहागपुर।


यहां भगवान शिव की कर्णप्रिय आरती होती है, जिसे सुनकर मन श्रद्धा से भर जाता है और  सोहागपुर के इस शिव पार्वती मंदिर में आरती के शब्दों को महसूस भी किया जा सकता है। दरअसल, यहां जो मूर्ति विराजित है, वो यहां की आरती के शब्दों के मुताबिक गढ़ी हुई है।


यहां रखी मूर्ति की ही महिमा है कि हर साल महाशिवरात्री पर यहां के छोटे से मंदिर में शिव पार्वती के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मूर्ति प्राचीन है, बताया जाता है कि 16वीं शताब्दी में एक खेत में हल चलाते वक्त मिली थी। मूर्ति की महिमा पता लगने के बाद बकायदा इसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई। मूर्ति पुरातत्व महत्व की भी मानी जाती है, जो सोहागपुर के लोगों के लिए गर्व की बात है।


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