ब्लॉग

"मैं भी इंसान हूं"

21 Nov 2017

हम समाज के उस तबके की बात करने जा रहे हैं, जिसे समाज भगवान का दर्जा देता है। शायद आप समझ ही गए होंगे कि में किसके बारे में बात कर रहा हूं, जी हां वो तबका है "डॉक्टर"। लेकिन डॉक्टरों को मिला हुआ यही दर्जा उनके लिए अभिषाप बनता जा रहा है। आए दिन सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों पर होने वाले हमले की घटनाएं इस बात की गवाह हैं। इसी तरह की सच्ची घटनाओं पर शोध करके एक जुझारू लेखक ने एक कहानी भी गढ़ी है, जिसमें उन्होंने डॉक्टरों की जिंदगी और उनके साथ घटने वाले हालातों पर एक अद्भुत चित्रण किया है। इस कहानी को उन्होंने नाम दिया है "में भी इंसान हूं"।



इस शार्ट फिल्म का चित्रण करने वाले लेखक और प्रोड्यूसर विजय तिवारी द्वारा चित्रित की गई कहानी एक डॉक्टर को केंद्रित करके बनाई गई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे वो अपने परिवार और समाज को त्याग कर मरीजों की सेवा में जुट जाता है, लेकिन जब किसी वजह से वो एक मरीज की जान बचाने में नाकाम हो जाता है, तो बिना सोचे समझे मरीज उसपर हमला कर देते हैं। इस कहानी के माध्यम से ये साबित होता है कि, डॉक्टरों की सुरक्षा का सवाल बड़ा है। समाज के लोगों को ये समझना पड़ेगा कि डॉक्टर भी इंसान होते है।



लोग अगर डॉक्टर पर भरोसा करके एक जिंदगी उनके हाथों में सौंपते हैं, तो डॉक्टर भी अपने ज्ञान की क्षमता से मरीज की जान को बचाने की कोशिश करता है। फिल्म के जरिए इसके लेखक और प्रोड्यूसर ने ये दिखाने की केशिश की है कि समाज को डॉक्टरों पर क्यों भरोसा करना चाहिए।



इस शार्ट फिल्म को "विजय तिवारी रिपोर्टर" नाम के यूट्रयूब चैनल पर प्रसारित किया गया है, जहां महज कुछ ही दिनो में इसे काफी सराहना मिली है। में इसका यूट्रयूब लिंक अपने लेख के साथ भी संलग्न कर रहा हूं, ताकि आप खूद भी इस कहानी के सार को समझें और समाज के इस बेहद अहम तबके को देखने का नजरिया तय करें।



वीडियो देखने के लिए क्लिक करें


Select Rate

Post Comment
 
Enter Code:
सम्बधित खबरे

loading...

देखें अन्य वीडियो

देखें अन्य फोटो