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बस एक मां है जो मुझसे कभी खफा नहीं होती...

14 May 2017

मदर्स-डे पर सोशल मीडिया में  लाखों  की तादाद में कमेंट्स पोस्ट हो रहे है। एक मित्र ने अपनी वॉल पर लिखा कि, “मां इस दुनिया में सबसे सुंदर है”, तो  किसी ने लिखा “मां एक अहसास है”। इलेक्ट्रानिक मीडिया में काम कर रहे सीनियर पत्रकार ने ममता को सलाम करते लिखा कि, “दवा असर ना करे तो नजर उतारती है, यह तो मां है जनाब, वो कहां हारती है”। लेकिन इन सबके बीच एक कमेंट ऐसा भी था, जिसमें लिखा था कि, “मेरे लिए मदस र्डे हर रोज होता है”। मेरे साथ टीवी चैनल में काम कर चुके एंकर ने अपनी वॉल पर मुनव्वर राणा द्वारा रचित इबारत लिखी, "लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती, बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती। घेरने जब भी मुझे बलाएं आईं, ढाल बनकर मेरे सामने मां की दुआएं आई।" 




मौजूदा दौर के शायर मुनव्वर राणा की कलम मां के प्यार की स्याही से जहन में मातृभक्ति की छाप छोड़ देती है। "ऐ अंधेरे देख ले मुह तेरा काला हो गया, मां ने आंख खोल दी घर में उजाला हो गया"। "इस तरह मेरे गुनाहों को धो देती है, मां जब बहुत गुस्से मे हो रो दे ती है"। "मेरी ख्वाइश है कि, मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं, मां से इस तरह लिपट जाऊं कि, बच्चा हो जाऊं।"



शशि कपूर और अमिताभ के बीच का मशहूर डायलॉग, मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, पैसा है, तुम्हारे पास क्या है? दीवार फिल्म का वीडियो दिन भर में कई शेयर और लाइक बटोर चुका है। सोशल साइट्स पर हजार लोग कमेंट कर रहे है। कुछ लोगों का कहना है कि, केवल मदर्स-डे पर ही मां क्यों याद आए, हर रोज उन युवाओं को अपने माता-पिता के साथ थोड़ा वक्त गुजारना चाहिए, जो काफी व्यस्त रहते है। उन्हें इस बात का भी ध्यान नहीं होता कि घर में उनका कोई इंतजार कर रहा होता है। 



"घर लौटने तक जिसे हर रोज चिन्ता होती है, वो मां है जो हमारी नींद लगने के बाद ही सोती है"। 



ब्लॉगर: तजिन्दर सिंघ, पत्रकार 


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